चुनाव के दौरान महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाको में लोग सूखे की मार से जूझ रहे थे। पानी की किल्लत से परेशान थे। लेकिन, सूखे पर राष्ट्रवाद भारी पड़ गया। किसान हो या नौजवान (नए वोटर) उन्हें राष्ट्रवाद और विकास का मुद्दा ज्यादा पसंद आया। मराठा आरक्षण भी अहम मुद्दा था फिरभी भाजपा ने जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में बारिश के बाद विधानसभा का चुनाव होना है। समझा जा रहा है कि यही नतीजे फिर दोहराए जा सकते हैं।
पवार परिवार को बड़ा झटका
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार खुद 14 चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन, उन्होंने कभी हार का मुंह नहीं देखा। लेकिन, इस बार न सिर्फ उनकी पुत्री सांसद सुप्रीया सुले को भाजपा कंचन कुल से करारी टक्कर मिली बल्कि पौत्र पार्थ पवार मावल लोकसभा सीट से बुरी तरह हारे। पार्थ पूर्व उपमुख्यमंत्री और शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के पुत्र हैं।
महाराष्ट्र
कुल सीटें: 48
भाजपा शिवसेना कांग्रेस राकांपा
2019 23 18 01 04
2014 23 02 04 18
2009 09 17 08 11
प्रकाश आंबेडकर ने बिगाड़ा खेल
भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर ने इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-एनसीपी का खेल बिगाड़ दिया। आंबेडकर ने एमआईएम के साथ गठबंधन कर दलित-मुस्लिम एकता का चक्रब्यूह तैयार किया जिसमें कांग्रेस और एनसीपी के कई दिग्गज फंस गए। वहीं, वंचित आघाड़ी का लाभ भाजपा-शिवसेना ने उठाया।