पित्रोदा के इस बयान को तूल पकड़ते देर नहीं लगी। अगले ही दिन उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। भाजपा ने पीएम मोदी ने भी कांग्रेस और पित्रोदा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा-
दिल्ली और देश भर में हजारों सिख मारे गए। उनकी दुकानें जला दी गईं। उनके घर फूंक दिए गए। दिल्ली से कई परिवारों को भागना पड़ा। अपना घर छोड़ना पड़ा। हर राज्य में सिखों को निशाना बनाया गया और नेतृत्व कांग्रेस ने किया। इस कत्लेआम पर कांग्रेस कह रही है, हुआ तो हुआ। कांग्रेस के लिए जीवन की कोई कीमत ही नहीं है।
इसे लेकर अरुण जेटली सहित भाजपा के बड़े नेताओं ने कांग्रेस और सैम पित्रोदा को निशाने पर लिया। कांग्रेस से पित्रोदा के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई। भाजपा की प्रेस कांफ्रेंस में सिख पीड़ितों को भी लाया गया और उस दौर की त्रासदी बयान की गई।
अब इसे लेकर कांग्रेस और सैम पित्रोदा दोनों सफाई दे रहे हैं। लेकिन तीर कमान से छूट चुका है। भाजपा ने मुद्दा लपकते हुए कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए हैं। पांच चरण का मतदान पूरा हो चुका है, दो चरण का बाकी है। 12 मई को दिल्ली और पंजाब में 19 मई को मतदान होना है। दोनों जगहों पर सिखों की आबादी काफी ज्यादा है। ऐसे में सैम पित्रोदा का बयान कांग्रेस को भारी पड़ जाए तो कोई हैरत नहीं होगी।