वाराणसी के लिए भाई राहुल और मां सोनिया ने नहीं भरी हामी
कुछ दिन पहले तक ऐसा माहौल बनाया गया कि प्रियंका गांधी वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी शंखनाद करेंगी। प्रियंका खुद भी कई बार कह चुकी थीं और राहुल गांधी ने भी कहा था कि कुछ भी हो सकता है। अंदाजा हमेशा गलत नहीं होता। ऐसा कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी भी पीएम मोदी के खिलाफ लड़ने को तैयार थीं, लेकिन राहुल गांधी और सोनिया गांधी नहीं चाहते थे कि पहले ही चुनाव में उन्हें हार का सामना करें।
पार्टी को एहसास था कि पहले ही चुनाव में नरेंद्र मोदी जैसे कद्दावर नेता से सामना करना आसान काम नहीं है। अगर प्रियंका यहां से हार जातीं तो उनका राजनीतिक करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता।
दूसरी ओर पार्टी के भीतरखाने से खबर यह भी आ रही है कि प्रियंका गांधी के वाराणसी से लड़ने का प्रस्ताव हमेशा परिवार के बीच ही रहा। कांग्रेस की स्क्रिनिंग कमिटी से लेकर केंद्रीय चुनाव समिति तक किसी भी स्तर पर प्रियंका का नाम सामने नहीं आया और वाराणसी से केवल अजय राय का नाम ही आगे बढ़ाया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ गांधीनगर में प्रियंका गांधी(File Photo)
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मां ने बेटे के लिए छोड़ी थी सीट, अब भाई बहन के लिए छोड़ेगा
अमेठी राहुल और प्रियंका गांधी के पिता दिवंगत राजीव गांधी की सीट रही है। साल 2004 में रायबरेली से चुनावी मैदान में उतरीं सोनिया गांधी इससे पहले तक अपने पति राजीव गांधी की सीट अमेठी से जीतती रहीं थी। बेटे राहुल के लिए उन्होंने 2004 में अमेठी छोड़ दी और रायबरेली को अपनी कर्मभूमि बनाया।
अब जबकि राहुल गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी और अपनी मां सोनिया गांधी की तरह दक्षिण का रुख किया है, तो ऐसा संभव है कि वह केरल की वायनाड सीट से चुनाव जीतने की सूरत में अपनी परंपरागत सीट अमेठी छोड़ सकते हैं। और संभव है कि ऐसे में प्रियंका गांधी अमेठी से चुनाव लड़ेंगी।
ऐसे में कांग्रेस परिवार की एक सीट भी बढ़ जाएगी और अमेठी सीट भी गांधी परिवार के पास रह जाएगी। इससे एक और लाभ यह होगा कि राहुल वायनाड से संसद पहुंच कर दक्षिण भारत को कांग्रेस के करीब लाने की संभावना को बल दे पाएंगे।