राजस्थान के झालावाड़-बारां लोकसभा सीट का नाम लेते ही वसुंधरा राजे का चेहरा सामने आता है। इस बार फिर से राजे की जगह उनके बेटे और वर्तमान सांसद दुष्यंत सिंह यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में भी दुष्यंत ने यहां से जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा ने दुष्यंत पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा टिकट दिया है। उनका मुकाबला भाजपा के बागी नेता और कांग्रेस के प्रत्याशी प्रमोद शर्मा से होगा। इस सीट की गिनती भाजपा के गढ़ के रुप में होती है। कांग्रेस ने यहां सेंध लगाने के इरादे से भाजपा के खिलाफ उनके ही बागी नेता को खड़ा कर के अपनी चाल चल दी है। ऐसे में यहां के मुकाबले पर पूरे देश की नजर होना स्वभाविक है। आगे विस्तार से पढ़िए झालावाड़-बारां लोकसभा सीट का सियासी इतिहास, यहां के चुनावी समीकरण और मैदान में खड़े उम्मीदवारों के बारे में-
झालावाड़-बारां लोकसभा सीट में अब तक के 16 लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा 8 बार भाजपा को और 4 बार कांग्रेस को जीत मिली है। पिछले 30 सालों से वसुंधरा राजे और दुष्यंत सिंह को जनता से मिलने वाले समर्थन से भाजपा ने यहां एकछत्र राज किया है। जब से वसुंधरा ने यहां सियासी पैर जमाया है, तब से किसी दूसरी पार्टी की दाल नहीं गल पाई है। 1989 से 1999 तक लगातार 5 बार वसुंधरा राजे यहां से सांसद बनीं। उनके बाद 2004 से अब तक दुष्यंत सिंह लगातार तीन बार यहां से सांसद हैं। पहले यह सीट केवल झालावाड़ थी, लेकिन 2008 के परिसीमन में झालावाड़ जिले की 4 और बारां जिले की 4 विधानसभा सीटों को मिलाकर झालावाड़ा-बारां संसदीय क्षेत्र का गठन किया गया।
2014 के लोकसभा चुनाव के मुताबिक यहां मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 16 लाख 69 हजार है, जिसमें से 8 लाख 68 हजार पुरुष और करीब 8 लाख महिला मतदाता हैं। जातिगत आधार पर इस सीट पर गुर्जरों का वोट निर्णायक माना जाता है। इनके बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, जैन और मुस्लिम समुदायों के वोट का भी खासा प्रभाव पड़ता है। 2014 में यहां 67.5 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें भाजपा को 59 फीसदी और कांग्रेस को 34.4 फीसदी वोट मिले थे। इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोज जैन भाया को दो लाख 81 हजार वोटों से हराते हुए लगातार तीसरी बार जीत हासिल की थी।
भाजपा की तरफ से दुष्यंत सिंह को मैदान में उतारना यहां के लिए सामान्य फैसला है, लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार चयन ने झालावाड़-बारां को हॉट-सीट बना दिया है। इसका कारण हैं कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद शर्मा। दरअसल प्रमोद शर्मा इससे पहले एबीवीपी से भी जुड़े हुए थे। बाद में वो भाजपा के युवा मोर्चा में जिम्मेदारियां सम्भालते हुए पार्टी की राजनीति का भी सक्रिय चेहरा बन गए, लेकिन 2018 में हुए विधानसभा चुनावों से पहले नाराजगी के कारण उन्होंने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। अब कांग्रेस भाजपा के गढ़ में उन्हीं के बागी को उतारकर फायदा उठाने की फिराक में है। दूसरी तरफ माना जाता है कि यहां की जनता पर भाजपा से ज्यादा मजबूत पकड़ वसुंधरा राजे और दुष्यंत सिंह की है। उन्हें लोगों का भरपूर समर्थन मिलता है। ऐसे में यहां का चुनावी महायुद्ध प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। देखना यह है कि भाजपा अपनी धाक जमाए रख पाती है या कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति कामयाब होती है।