लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई में इस बार राजस्थान में कई ऐसी सीटें हैं जिनपर हर किसी की नजर लगी हुई है। कांग्रेस के दबदबे वाली बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र ऐसी ही एक सीट है। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे व पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। यहां से उनके बेटे मानवेंद्र सिंह कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। भाजपा के नए उम्मीदवार पूर्व विधायक कैलाश चौधरी को मैदान में उतारा है।
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मोदी लहर में 40.09 फीसदी और कांग्रेस को 18.12 फीसदी वोट मिले। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कर्नल सोनाराम चौधरी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ने वाले जसवंत सिंह को 87,461 मतों से हराया। भाजपा के कर्नल सोनाराम को 4,88,747 और जसवंत सिंह को 4,01,286 वोट मिले थे। जबकि 2,20,881 मतों के साथ कांग्रेस सांसद हरीश चौधरी तीसरे स्थान पर रहे।
सोनाराम का रिपोर्ट कार्ड
बाड़मेर सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी भाजपा के टिकट पर सांसद बनने से पहले तीन बार कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। राजनीति में आने से पहले सोनाराम चौधरी भारतीय सेना में 26 साल तक रह चुके हैं। उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई जोधपुर से एमबीएम इंजिनियरिंग कॉलेज से पूरी की। साल 2014 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक सोनाराम चौधरी के पास कुल 17.46 करो़ड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति थी।
जातीय समीकरण और कुल मतदाता
यहां 91.67 प्रतिशत ग्रामीण और 8.33 प्रतिशत शहरी आबादी। कुल आबादी का 16.59 फीसदी अनुसूचित जाति और 6.77 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं। बाड़मेर लोकसभा सीट पर करीब 17 लाख मतदाताओं में से 3.5 लाख जाट, 2.5 लाख राजपूत, 4 लाख एससी-एसटी, 3 लाख अल्पसंख्यक और शेष अन्य जातियों के मतदाता हैं। वहीं 2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़ो के मुताबिक बाड़मेर में 8,95,593 पुरुष और 7,81,989 महिला मतदाता हैं।