चौथे चरण के मतदान के साथ ही महाराष्ट्र की 48 सीटों पर लोकसभा चुनावों के लिए मतदान पूरा हो जाएगा। देश में अगर भाजपा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और काम के सहारे लोकसभा चुनावों के रण को जीत लेने का भरोसा है, तो महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भाजपा के खेवनहार बनकर उभरे हैं।
यह फडणवीस के कामकाज और राजनीति की शैली का ही कमाल है कि लोगों में राज्य में भाजपा सरकार बने करीब साढ़े चार साल होने के बावजूद कोई खास नाराजगी नहीं है। इसलिए भाजपा शिवसेना गठबंधन को पूरा भरोसा है कि इस बार भी चुनावी नतीजों में पिछली बार की तरह उसका पलड़ा भारी रहने वाला है।
ऐसा नहीं है कि पिछले साढ़े चार सालों में महाराष्ट्र में कोई मुद्दा नहीं रहा। राज्य में किसानों का असंतोष आज भी बरकरार है। विदर्भ और मराठवाड़ा में पानी की समस्या जस की तस है। नोटबंदी और जीएसटी से कारोबार पर पड़े असर से लोग अभी भी पूरी तरह उबरे नहीं हैं। भीमा कोरेगांव की हिंसा का दंश और तकलीफ दलितों में अभी भी है।
इसके बावजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिस तरह बार-बार मार्च लेकर मुंबई आए किसानों को शांति से संतुष्ट करके वापस भेजा। भीमा कोरेगांव कांड और मुंबई में मुसलमानों की रैली के बाद भड़की हिंसा के बावजूद कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया और यह कोई बडा मुद्दा नहीं बन सका।
सियासी मामलों में भी मुख्यमंत्री ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया है उसके भाजपा के साथ साथ विपक्षी दल भी कायल हैं। शिवसेना की लगातार उलटबांसी पर कोई प्रतिक्रिया न देकर शिवसेना समर्थकों की नाराजगी नहीं बढ़ने दी। चुनावों से पूर्व नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे को भाजपा में मिलाकर कांग्रेस को झकझोर दिया। विखे पाटिल ने भी नेता विपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
जिस तरह केंद्र में सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी और लगभग दुश्मनी जैसी स्थिति है, उसके उलट मुंबई में कांग्रेस एनसीपी नेताओं को मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से कोई शिकायत नहीं है। इसकी तस्दीक मुंबई के कांग्रेसी नेता जाकिर भाई भी करते हैं। वह कहते हैं कि जैसे दूसरे मुख्यमंत्री ज्यादातर हवा में रहते थे, फडणवीस ने जमीन नहीं छोड़ी है। शायद इसकी एक वजह यह भी है कि फडणवीस ब्राह्मण हैं जिनकी महाराष्ट्र में कुल आबादी करीब तीन फीसदी ही है, इसलिए उन्हें सबको साथ लेकर चलना पड़ता है।
मुख्यमंत्री की सहजता और उपलब्धता ने भी लोगों में सत्ता विरोधी रुझान नहीं बनने दिया है। शायद यही वजह है कि मोदी और शाह ने महाराष्ट्र के चुनावी सागर में भाजपा शिवसेना गठबंधन की पतवार पूरी तरह देवेंद्र फडणवीस के हाथों में सौंप रखी है। आम लोगों में भी सरकार को लेकर यही राय है कि फडणवीस सरकार ठीक ठाक काम कर रही है। मुंबई सेंट्रल में रहने वाले कारोबारी किशन गुप्ता हों या टैक्सी चलाने वाले जयराम सरकार को लेकर उन्हें कोई नाराजगी नहीं है।