नरेंद्र मोदी ने 21 नवंबर 2013 को प्रकाशित इंडिया टुडे की खबर का हवाला देते हुए ट्वीट किया कि क्या कोई कभी ये कल्पना कर सकता है कि भारतीय सैन्य बलों का प्रमुख युद्धपोत को निजी छुट्टियों के लिए टैक्सी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है?
विमान वाहक आईएनएस विराट को भारतीय नौसेना में 1987 में सेवा में लिया गया था। करीब 30 वर्ष तक सेवा में रहने के बाद 2016 में इसे सेवा से अलग किया गया। मोदी ने जिस खबर का हवाला दिया है उसके मुताबिक ये द्वीप लक्षद्वीप के 36 द्वीपों में से एक है और इसका नाम है बंगाराम। यह द्वीप पूरी तरह निर्जन है और तकरीबन आधा वर्गकिलोमीटर इलाके में फैली है। इस द्वीप का चुनाव भी काफी सोच-समझकर किया गया था, यहाँ विदेशी नागरिकों के आने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं थी। लक्षद्वीप के तत्कालीन पुलिस प्रमुख पीएन अग्रवाल ने कहा कि बंगाराम द्वीप बेहद सुरक्षित और दुनिया से कटा हुआ इलाका है। यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से सुरक्षित है।
खबर के मुताबिक इसमें जो लोग शामिल थे, वो सभी खुद इतने हाईप्रोफाइल थे कि यह खबर दब न सकी। राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गांधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, सोनिया गांधी की मां, उनके भाई और मामा शामिल थे। इस दौरे में राजीव गांधी के करीबी मित्र अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और तीन बच्चे भी शामिल थे। इन बच्चों में अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी भी शामिल थी।राजीव और सोनिया गांधी 30 दिसंबर 1987 को दोपहर में ही इस खूबसूरत द्वीप पर पहुँच गए थे, जबकि अमिताभ बच्चन एक दिन बाद कोचीन-कावारत्ती हेलीकॉप्टर उड़ान से वहाँ पहुँचे थे।
बंगाराम द्वीप पर अमिताभ बच्चन की यात्रा की खबर को दबाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कावारत्ती के छोटे से द्वीप में अमिताभ की मौजूदगी उस वक्त जाहिर हो गई जब अमिताभ के हेलीकॉप्टर को बंगाराम से कुछ दूर कावारत्ती में ईंधन भरवाने के लिए उतरना पड़ा। बाद में अमिताभ जब छुट्टियां मनाकर वापस लौट रहे थे तो कोचीन एयरपोर्ट पर इंडियन एक्सप्रेस के एक फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीर ले ली। अमिताभ इसे लेकर नाराज भी हुए और फोटोग्राफर को चेतावनी भी दी थी।