कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को चुनाव आयोग पर भाजपा की ‘ज्यादतियों’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों पर ‘मूकदर्शक’ बने रहने का आरोप लगाया और कहा कि आयोग देश की जनता की आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। पूर्व केंद्रीय वित्त एवं गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा ने राष्ट्रवाद का जो नारा गढ़ा है, वह राजग सरकार की नाकामियों को छिपाने की चाल है।
मेरा मानना है कि चुनाव आयोग ने व्यापक तौर पर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा नहीं किया है। वह भाजपा की ज्यादतियों, मोदी की बातों और भाजपा द्वारा अथाह धन खर्च किये जाने पर मूकदर्शक बना हुआ है।
विपक्ष ने हाल ही में चुनाव आयोग से शिकायत कर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने अपनी चुनावी रैलियों में बार-बार सशस्त्र बलों का नाम लेकर आचार संहिता का ढिठाई से उल्लंघन किया है। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री के प्रचार अभियान पर कुछ समय के लिए रोक लगनी चाहिए। कांग्रेस के मुताबिक वह चुनाव आयोग को 37 ज्ञापन दे चुकी है जिनमें 10 मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के ‘नफरत भरे भाषणों, द्वेषपूर्ण, विभाजनकारी, ध्रुवीकरण करने वालों बयानों’ से जुड़े हैं।
उन्होंने दावा किया, ‘राष्ट्रवाद उनकी नाकामियों को छिपाने का नारा है। हर भारतीय देशभक्त है। किसी देशभक्त को राष्ट्र-विरोधी नहीं कहा जा सकता। भाजपा ने मीडिया के सहारे राष्ट्रवाद के विचार को भुनाया है जिसका कोई मतलब नहीं है। प्रासंगिक प्रश्न केवल यह है कि क्या हर भारतीय पांच साल पहले से ज्यादा खुश है। मेरा कहना है ‘नहीं’। हर भारतीय डर में जी रहा है। महिलाएं, दलित, आदिवासी, पत्रकार, शिक्षाविद सभी डर में जी रहे हैं।’
आम चुनाव के बाद संप्रग-3 की सरकार बनने की संभावनाओं के प्रश्न पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भाजपा फिर सत्ता में नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार गैर-भाजपाई होगी। जाहिर तौर पर कांग्रेस और चुनाव पूर्व हुए विपक्षी गठजोड़ बड़ी भूमिका निभाएंगे। अगर चुनाव के बाद और गठबंधन होते हैं तो मुझे लगता है कि संप्रग-3 की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं।’
चिदंबरम के मुताबिक सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस जैसे समस्त गैर-भाजपा दल स्थिर सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि सपा, बसपा और टीएमसी कांग्रेस और अन्य संप्रग दलों के साथ हाथ मिलाएंगे जो अभी अलग अलग चुनाव लड़ रहे हैं।’