हरियाणा के सिरसा लोकसभा क्षेत्र में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के प्रभाव से कोई अनजान नहीं है। गुरमीत राम रहीम भले ही जेल की सलाखों में बंद हैं, लेकिन उनके 1.5 लाख अनुयायी सिरसा लोकसभा सीट के भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यहां किसी भी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने या दूर हटाने में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों का बड़ा हाथ होता है।
29 अप्रैल को स्थापना दिवस के दिन डेरा मुख्यालय में लाखों की संख्या में अनुयायियों की भीड़ उमड़ी थी। डेरा आने वाले लोगों में उस दिन सिरसा से कांगेस उम्मीदवार अशोक तंवर भी शामिल थे। माना जा रहा है कि ऐसा करके कांग्रेस, डेरा सच्चा सौदा का समर्थन हासिल करना चाहती है। इतनी भारी संख्या देख कर ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र की राजनीति पर इनकी पकड़ कितनी मजबूत होगी।
हालांकि डेरा पर सियासी नजर डालने वाली कांग्रेस इकलौती पार्टी नहीं है। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत के पीछे भी डेरा समर्थकों का भारी समर्थन माना जाता है। हालांकि तीन साल बाद ही डेरा ने पाला बदला और 2017 में पंजाब में कांग्रेस और कैप्टन अमरिंदर सिंह का समर्थन कर दिया।
इस बार डेरा समर्थकों के मन में भाजपा को लेकर विरोध इसलिए है क्योंकि उनके मुताबिक गुरमीत राम रहीम की गिरफ्तारी के पीछे भाजपा है। आईएनएलडी से डेरा के रिश्ते शुरूआत से ही बिगड़े हुए हैं, ऐसे में इस बार उनके पास कांग्रेस को समर्थन देने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं दिख रहा है।