दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने वाले देश में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। प्रथम चरण का मतदान संपन्न हो चुका है। रैलियों में एक-दूसरे पर शब्दों के बाण चल रहे हैं, तो दूसरी ओर वादों की झड़ी लगी है। इन सबके बीच एक सवाल खड़ा होता है कि देश में ऐसे कितने वोटर हैं, जो किसी न किसी राजनीतिक दल को अपना वोट तो देते हैं, मगर उन्हें पार्टी के संविधान की कोई जानकारी नहीं होती।
बता दें कि निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों से संबंधित कई जानकारियां अपनी वेबसाइट पर अपलोड की हैं। इसमें राजनीतिक दल का संविधान कैसा है, उसकी मूल विचारधारा क्या है, उसमें कब-कौन से संशोधन किए गए हैं, आदि जानकारियां समाहित रहती हैं। किसी एक खास विचारधारा पर चलने वाली पार्टी किन परिस्थितियों में दूसरे विचारों वाली पार्टी के साथ गठबंधन कर लेती है। अधिकांश वोटरों को यह नहीं पता होता कि उन पार्टियों का मूल संविधान क्या कहता है। क्या उन दलों के संविधान में ये लिखा है कि जरुरत पड़ने पर वे अपने से विपरित विचारधारा वाली पार्टी के साथ समझौता कर लेंगे।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि वेबसाइट पर पार्टियों का संविधान तो है, मगर उसे देखने वालों की संख्या न के बराबर है। हैरानी की बात है कि 90 करोड़ वोटरों में से करीब सात हजार वोटर ऐसे हैं, जो भूले-भटके 'राजनीतिक दलों के संविधान' वाले पन्ने पर पहुंचते हैं। करीब 35 सौ ऐसे लोग हैं, जिन्होंने संविधान को डाउलनोड किया है।
| राजनीतिक दल | इतने लोगों ने देखा |
डाउनलोड किया |
| आम आदमी पार्टी | 777 | 539
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| एआईएडीएमके | 333 | 137 |
| एआईएफबी | 262 | 43 |
| एआईटीसी | 243 | 100 |
| अरुणाचल कांग्रेस | 179 | 36 |
| बीएसपी | 582 | 276 |
| भाजपा | 683 |
481 |
| सीपीआई | 201 | 84 |
| डीएमके | 186 | 86 |