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संसद में साजिश: पीएम मोदी को सदन न आने की सलाह क्यों? सुरक्षा को लेकर स्पीकर की चिंता जायज; कटघरे में विपक्ष

Mon, 09 Feb 2026 09:25 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सदन में अभूतपूर्व अराजकता के बीच स्पीकर ओम बिरला को प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा को लेकर वास्तविक चिंता थी।

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पीएम मोदी के खिलाफ हमले की साजिश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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लोकसभा में पिछले सप्ताह हुए हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर स्पीकर ओम बिरला की चिंता पूरी तरह वास्तविक और जायज थी। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने सोमवार को विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री को कोई तत्काल खतरा नहीं था।

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सूत्रों के मुताबिक, बीते बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हालात तेजी से बिगड़ गए थे। विपक्षी सांसदों ने संसदीय मर्यादाओं की अनदेखी करते हुए वेल ऑफ द हाउस में प्रवेश किया। कुछ सांसदों के मेजों पर चढ़ने, सरकारी दस्तावेज फाड़ने और उन्हें अध्यक्ष की ओर फेंकने से सदन में अनुशासन पूरी तरह टूट गया।

महिला सांसदों की आक्रामक बढ़त से बढ़ी चिंता
सूत्रों ने बताया कि इस अराजकता के बीच कई महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट की ओर आक्रामक तरीके से बढ़ीं, जिससे वहां एक तरह का घेरा बन गया। कुछ महिला सदस्य बैनर और तख्तियां लेकर ट्रेजरी बेंच तक पहुंच गईं और वरिष्ठ मंत्रियों के बैठने की जगह में घुस गईं। इससे सदन में असुरक्षा और अव्यवस्था की स्थिति और गंभीर हो गई।
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स्पीकर की सलाह पूरी तरह संवैधानिक दायित्व के तहत
इन हालात को देखते हुए स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को उस समय लोकसभा कक्ष में न आने की सलाह दी। सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय केवल प्रधानमंत्री की सुरक्षा, सदन में व्यवस्था बनाए रखने और संसदीय गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया था। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, स्पीकर की प्राथमिक संवैधानिक जिम्मेदारी सदन में अनुशासन, मर्यादा और व्यवस्था सुनिश्चित करना है और उनका यह कदम इसी दायित्व के अनुरूप था।

विपक्ष के आरोप तथ्यहीन
सूत्रों ने विपक्ष के इस दावे को भी गलत बताया कि स्पीकर ने सत्तारूढ़ दल के दबाव में यह सलाह दी। उनका कहना है कि विपक्ष का यह आरोप तथ्यों से परे है और सदन में उस दिन जो घटनाएं हुईं, वे खुद स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं। बाद में जब विपक्षी सांसद स्पीकर के कक्ष में पहुंचे, तब भी असंसदीय भाषा और धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसका उल्लेख स्वयं स्पीकर ने अगले दिन सदन में किया था।

लगातार हंगामे से ठप हो रही कार्यवाही
गौरतलब है कि 2 फरवरी से लोकसभा में लगातार हंगामा हो रहा है। नेता विपक्ष राहुल गांधी को भारत-चीन संघर्ष से जुड़ी एक रिपोर्ट का हवाला देने की अनुमति न मिलने के बाद विवाद बढ़ गया। इसके चलते सात कांग्रेस और एक CPI-M सांसद को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित भी किया गया।
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संसद को बेअसर बनाने की कोशिश कर रही सरकार- मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार ने संसद को निष्प्रभावी बनाने के लिए हर संभव कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सदन चलाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन अगर सरकार जिद पर अड़ी रहे तो कुछ नहीं किया जा सकता। मीडिया से बातचीत में तिवारी ने कहा, देश की सर्वोच्च विधायी संस्था को अप्रासंगिक बनाने की दिशा में सरकार ने एक कदम आगे बढ़कर काम किया है। विपक्ष को संसद में गंभीर मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया जा रहा। तिवारी ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश, जिसमें रूस से तेल न खरीदने की बात कही गई है और सांसदों के निलंबन जैसे मुद्दे बेहद अहम हैं। इन सभी विषयों का देश की रणनीतिक स्वायत्तता और विदेश व आर्थिक नीति पर गहरा असर पड़ सकता है, लेकिन विपक्ष को इन पर अपनी बात रखने की अनुमति नहीं मिली।

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