संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण बृहस्पतिवार को समाप्त हो गया। पहले हफ्ते में महंगाई और अन्य विवाद के कारण ठप रही कार्यवाही की भरपाई लोकसभा ने ज्यादा काम करके की। इस दौरान लोकसभा ने 18 तो राज्यसभा ने 19 विधेयकों पर सहमति की मुहर लगाई। इस सत्र ने दिल्ली के उपराज्यपाल को ज्यादा शक्तियों से लैस किया तो गोद लेने की मंजूरी का जिम्मा जिले के डीएम और एडीएम के हवाले किया।
शुरुआती व्यवधानों के बाद लोकसभा की उत्पादकता 114 फीसदी रही और कार्यवाही कई बार मध्य रात्रि तक चली। निम्न सदन में निर्धारित समय से 48 घंटे 23 मिनट अधिक काम हुआ। पूरे सत्र में हुई 24 बैठकों के दौरान मौखिक रूप से 84 प्रश्न पूछे गए। शून्य काल के दौरान 583 मुद्दे तो नियम 377 के तहत 405 मामले उठाए गए। इस दौरान मंत्रियों की ओर से 48 वक्तव्य दिए गए। महिला दिवस के अवसर पर महिला सशक्तीकरण पर अल्पकालिक चर्चा हुई।
इन अहम विधेयकों को मिली मंजूरी
सत्र के दौरान दिल्ली में उपराज्यपाल की शक्तियों को परिभाषित करने वाले दिल्ली राष्ट्रीय राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन), गोद लेने की प्रक्रिया में बदलाव के लिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक को मंजूरी मिली। इसके अलावा वित्त, बीमा संशोधन, मध्यस्थम-सुलह संशोधन, खान-खनिज संशोधन, स्वास्थ्य देख रेख वृत्ति आयोग विधेयकों को मंजूरी मिली।
शुरुआत और अंत दोनों में हंगामा
सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत और अंत हंगामे से हुई। शुरुआती एक हफ्ता पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ी कीमतों पर हुए हंगामे की भेंट चढ़ा, जबकि अंत में दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने वाले विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर द्वारा महाराष्ट्र के सीएम को लिखे गए सौ करोड़ की वसूली वाले पत्र पर भी दोनों सदनों में सरकार और विपक्ष आमने-सामने आए।
महिलाओं के हवाले रही लोकसभा
महिला दिवस के दिन स्पीकर ओम बिरला ने अहम पहल की। आठ मार्च को सदन का संचालन महिलाओं ने किया। महिला सशक्तीकरण पर हुई अल्पकालिक चर्चा में सभी दलों की महिला सांसदों ने हिस्सा लिया। इस दौरान आसन की जिम्मेदारी भी महिला सांसदों ने ही संभाली। बिरला ने इस दिन महिला सांसदों और महिला पत्रकारों से मुलाकात की।
अधिक काम का सिलसिला रहा कायम
नई लोकसभा में निर्धारित समय से अधिक कार्य करने का सिलसिला जारी रहा। इस सत्र में लोकसभा की कार्य उत्पादकता 114 फीसदी रही। इससे पहले संपन्न हुए चार सत्रों में भी लोकसभा में तय से अधिक काम हुआ था। पहले सत्र में 125 प्रतिशत, दूसरे सत्र में 115 प्रतिशत, तीसरे सत्र में 117 प्रतिशत और चौथे सत्र में 167 प्रतिशत कार्य उत्पादकता रही थी।
राज्यसभा में पिछले चार सत्रों में 94 फीसदी कामकाज
राज्यसभा ने बजट सत्र के दूसरे चरण में रिकॉर्ड 90 फीसदी काम किया। सभापति एम वेंकैया नायडू ने बताया कि हंगामे में 21 घंटे गंवाए तो 14 घंटे 28 मिनट अतिरिक्त काम करके भरपाई भी की। इस चरण में तीन सदस्यों को सेवानिवृत्त होने पर विधाई दी। सभापति ने कहा, सदन के कामकाज में जून 2019 के बाद से लगातार बढ़ोतरी हुई है, इसका नतीजा है कि पिछले चार सत्रों के दौरान कुल 94 फीसदी कामकाज हुआ। इसके लिए उन्होंने सदस्यों का आभार प्रकट किया।