भारतीय संसदीय इतिहास में बुधवार का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, मोदी सरकार में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री अमित शाह सदन में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने वाले हैं।
एक साथ आएंगे तीन विधेयक
संसदीय कार्यसूची के मुताबिक, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संविधान (131वां) संशोधन विधेयक-2026 और परिसीमन विधेयक-2026 को सदन के पटल पर रखेंगे। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह संघ शासित क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक-2026 पेश करेंगे।
इन विधेयकों की सबसे खास बात यह है कि कानून मंत्री मेघवाल ने एक विशेष प्रस्ताव भी तैयार किया है। इस प्रस्ताव के जरिए वह सदन से आग्रह करेंगे कि 'परिसीमन विधेयक' और 'संघ शासित क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक' को अलग-अलग चर्चा के बजाय एक साथ पारित किया जाए। सरकार का मानना है कि ये दोनों विधेयक एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें एक साथ पास करना विधायी प्रक्रिया के लिए बेहतर होगा।
क्या होगा इन विधेयकों का असर?
इन विधेयकों के केंद्र में देश के निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन है। अगर यह सदन से पारित होता है तो लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या में बदलाव होना तय है।
सीटों की संख्या में वृद्धि: माना जा रहा है कि 131वें संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती है। महिला आरक्षण का रास्ता साफ: सीटों की संख्या बढ़ने से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करना आसान हो जाएगा। वहीं, इससे मौजूदा पुरुष सदस्यों की सीटों पर प्रभाव डाले बिना महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जा सकेंगी।
केंद्र शासित प्रदेशों में बदलाव: अमित शाह की ओर से पेश किया जाने वाला विधेयक विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और पुदुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों के समीकरण और प्रशासनिक व्यवस्था को नए परिसीमन के अनुरूप ढालने का काम करेगा। विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि नए परिसीमन का आधार कौन सी जनगणना होगी और उत्तर एवं दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन कैसे बनाया जाएगा। फिलहाल, सरकार इन विधेयकों को पारित कराकर भविष्य के चुनाव की नई नींव रखने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही है।
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विपक्ष ने क्या-क्या कहा?
हालांकि, इस बीच विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम सभी महिला आरक्षण बिल के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार जिस तरह से इसे लेकर आई है, वह राजनीति से प्रेरित है। हमने हमेशा इस बिल का समर्थन किया है, लेकिन हमारा आग्रह है कि पुराने संशोधनों को लागू किया जाए। सरकार परिसीमन और जनगणना के नाम पर चालें चल रही है। कार्यपालिका के जरिए संविधान की उन शक्तियों को हथिया रही है जो संसद और संस्थाओं के पास होनी चाहिए; इन्होंने पहले भी असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन में हमें धोखा दिया है। इसलिए हम इस बिल के मौजूदा स्वरूप का एकजुट होकर संसद में विरोध करेंगे।