लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए का ही हिस्सा बनकर चुनाव लड़ेगी। भाजपा नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद पासवान की नाराजगी और एनडीए छोडने की अटकलों पर विराम लग गया है। रविवार को एनडीए के सहयोगी दलों की बैठक के बाद सीटों के बंटवारे की विधिवत घोषणा की जाएगी।
भाजपा के रणनीतिकारों ने बिहार में सीटों का फार्मूला निकाल लिया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि भाजपा और जदयू एक बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जानकारी के मुताबिक नए फार्मूले में ये दोनों दल 17-17 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। जबकि कुल 40 सीटों में शेष छह सीटें अब पासवान की लोजप को जाएंगी। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए छोडने के बाद भी भाजपा की नजर उनके करीबी अरुण कुमार पर है जिसे भाजपा अपने कोटे से एक सीट दे सकती है। पासवान खुद 2019 का चुनाव स्वास्थ्य कारणों से नहीं लडना चाहते हैं जिसके लिए उन्होंने पहले भी राज्यसभा में जाने की इच्छा जताई थी। बताते हैं भाजपा इसके लिए भी तैयार हो गई हो अगले साल असम के रास्ते उन्हें राज्यसभा भेजने का आश्वासन दिया गया है।
शुक्रवार को लोजप नेता रामविलास पासवान और चिराग पासवान की भाजपा नेता अरुण जेटली से हुई मुलाकात के बाद गतिरोध दूर हो गया था। पहले शनिवार की शाम को ही संयुक्त रूप से इसकी घोषणा होनी थी लेकिन पासवान के दिल्ली में न होने के चलते इसे रविवार तक टाल दिया गया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी दिल्ली में मौजूद हैं। रविवार को एक बार फिर एनडीए के नेता एकसाथ बैठेंगे और फिर सीटों के बंटवारे की घोषणा की जाएगी। कौन कहां से लड़ेगा इसे लेकर नीतीश कुमार ने भी अपने पदाधिकारियों के साथ बैठक की है।
2014 के लोकसभा चुनाव के रामविलास पासवान की पार्टी 7 सीटों वैशाली, जमुई, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगडिय़ा, मुंगेर और नालंदा से लड़ी थी। जिसमें नालंदा को छोड़कर सभी सीटें जीती थीं। ऐसे में एक बार फिर उनका दावा इन सीटों पर है। लोजप ने नालंदा सीट लगभग छोडने का फैसला कर लिया है। ये सीट जदयू के लिए छोड़ रही है क्योंकि ये उन्हीं ने जीती थी। वहीं वैशाली सीट से सांसद रमाकिशोर सिंह ने लोजप से लडने को इंकार कर दिया है। बावजूद पासवान वैशाली सीट नहीं छोडना चाहते हैं। मोटे तौर पर पासवान की नाराजगी और सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा ने उन्हें मना लिया है लेकिन सीटों की अदला-बदली को लेकर कुछ बदलाव संभावित है। पासवान अपनी जीती हुईं सीटें नहीं छोड़ना चाहते हैं। भाजपा ने पिछले चुनाव में 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 22 पर जीत दर्ज की थी।