पश्चिम बंगाल सरकार ने संपूर्ण लॉकडाउन को लेकर अगस्त महीने के लिए सात अलग-अलग दिनों को निर्धारित किया है, ताकि राज्य में बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण की रफ्तार पर रोक लगाई जा सके। इसके लिए सरकार ने छह घंटे में तीन बार तिथियों को बदला और आखिरकर इस नतीजे पर पहुंची कि अगस्त महीने में 5, 8, 16, 17, 23, 24 और 31 तारीख को राज्य में पूर्ण लॉकडाउन लागू किया जाएगा।
तारीखों में इतने बदलाव को लेकर विपक्षी पार्टियों ने ममता सरकार को निशाने पर लिया और कहा कि सरकार कोरोना रोकने में असक्षम है और केवल तुष्टीकरण का काम कर रही है। सीपीएम विधायक सुजन चक्रवर्ती ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि क्या ये सरकार है या कोई सर्कस।
दरअसल, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को दो अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लॉकडाउन की तारीखों की घोषणा की। पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि ईद की वजह से एक अगस्त और स्वतंत्रता दिवस के कारण 15 अगस्त को लॉकडाउन लागू नहीं किया जाएगा, इसके अलावा हर सप्ताहांत में लॉकडाउन लागू किया जाएगा। यहां बताया गया कि रक्षा बंधन त्योहार 3 अगस्त को है, जिसे सरकारी कैलेंडर में 5 अगस्त कर दिया गया है।
दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम ममता ने अपनी गलती को स्वीकार किया और लॉकडाउन के लिए नई तारीखों का एलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त में नौ अलग-अलग दिनों में लॉकडाउन लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी कैलेंडर में कोई गलती नहीं थी। यह हमारी भूल थी।
हालांकि, मंगलवार को 10 बजे बंगाल गृह विभाग ने ट्वीट कर कहा कि लॉकडाउन को अगस्त में सात दिनों के लिए लागू किया जाएगा, ना कि नौ दिनों के लिए। सरकार को कुछ लॉकडाउन तारीखों के खिलाफ कई अपीलें मिलीं जो त्योहारों के साथ मेल खाती थीं। विभाग ने कहा कि हम लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए 2 अगस्त और 9 अगस्त के लिए पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा को वापस ले रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राहुल सिन्हा ने कहा कि महामारी के बीच भी, वह (ममता बनर्जी) अपनी तुष्टिकरण की राजनीति जारी रखे हुए हैं। भाजपा नेता सायंतन बोस ने सवाल किया कि 5 अगस्त को लॉकडाउन क्यों है, जब अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी, जबकि 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की सालगिरह है।