मैंने अपनी पत्नी को दूसरे कमरे में सोने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया। मेरी बहू गर्भवती है और गुजरात में है। मैं किसी को भी परेशानी में नहीं डलाना चाहता था। रेवाड़ी में व्याख्यान देने के बाद मैंने अपनी आवाज लगभग खो सी दी थी।
पर्यटकों को अस्पताल लाए जाने दो दिन बाद मुझे बुखार आ गया। मुझे खुद की जांच करवानी पड़ी और शुक्र है कि परिणाम नकारात्मक थे। इसी तरह डॉ. कटारिया के पति शहर में एक फार्महाउस में शिफ्ट हो गए, क्योंकि वह गठिया से पीड़ित हैं। कटारिया के बच्चे उसी घर में अलग-अलग कमरों में उनके साथ रह रहे हैं।
डॉ. कटारिया ने बताया कि मुझे लगता है कि यह मरीजों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण था। एक मरीज का अभी भी इलाज चल रहा है, उसने मुझसे पूछा कि क्या वह जीवित है। वह बहुत आशंकित था।
मेहता ने सहमति जताते हुए कहा कि एक ऐसे देश में होना जहां आप अपने परिवार के साथ नहीं हो सकते हैं। यहां तक कि कहीं आना जाना भी निराशाजनक है। मरीजों के लिए यह काफी मुश्किल रहा। फिर भी हमारी टीम ने भाषा अलग होने के बावजूद उन्हें प्रेरित करने का प्रयास किया।
कटारिया ने कहा कि हमारे बीच 90 प्रतिशत गैर-मौखिक बातचीत थी। जांच के हर दौर के बाद हम अंगूठे का उपयोग करते थे। इसके अलावा एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जहां दैनिक अपडेट के लिए इटली के दूतावास के अधिकारियों को शामिल किया गया था। जिन मरीजों का बेहतर स्वास्थ्य था, उन्होंने फोन का उपयोग किया और टेलीविजन देखा। इटली दूतावास ने उनके लिए किताबें भेजी थीं।