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Live: आखिरी सफर पर अरुण जेटली, थोड़ी देर बाद निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 25 Aug 2019 02:04 PM IST
अरुण जेटली का पार्थिव शरीर - फोटो : ANI

खास बातें

  • थोड़ी देर बाद निगम बोध घाट पर होगा अंतिम संस्कार
  • जेटली ने शनिवार दोपहर 12:07 बजे एम्स में ली अंतिम सांस
  • फेफड़ों में पानी भरने के चलते हो रही थी सांस लेने में तकलीफ
  • प्रखर अधिवक्ता और ओजस्वी वक्ता जेटली सॉफ्ट टिश्यू कैंसर से पीड़ित थे
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली अंतिम सफर पर हैं। उनका पार्थिव शरीर भाजपा मुख्यालय से निगम बोध घाट पहुंच चुका है। थोड़ी देर बाद यमुना के किनारे निगम बोध घाट पर उनका पूरे राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया जाएगा। भाजपा मुख्यालय से निगम बोध घाट फूलों से सजी तोप गाड़ी में ले जाया गया। पूरा माहौल ‘जेटली जी अमर रहें’ के नारों से गूंज गया। इससे पहले पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए भाजपा मुख्यालय लाया गया, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं ने जेटली को श्रद्धांजलि दी। 66 वर्षीय जेटली का शनिवार को एम्स में निधन हो गया था जहां नौ अगस्त को उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। सुबह पूर्व वित्त मंत्री का पार्थिव शरीर उनके कैलाश कॉलोनी स्थित घर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय लाया गया। 
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इस वजह से हुए थे एम्स में भर्ती

एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि फेफड़ों में पानी भरने के कारण सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें एम्स लाया गया था। इस वजह से उनके दिल पर भी असर पड़ रहा था। उन्हें जीवनरक्षक उपकरण पर भी रखा गया था, मगर डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। 

इससे पहले सुबह जेटली की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही सबसे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन एम्स पहुंचे। इसके बाद भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी एम्स पहुंचे। इन लोगों के पहुंचने के करीब 20 मिनट बाद एम्स ने आधिकारिक रूप से पूर्व वित्त मंत्री के निधन की पुष्टि की। 

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विदेश में की घोटालों की पड़ताल

पिछले बीस वर्षों के दौरान जेटली ने वाणिज्य, सूचना प्रसारण, कानून, कंपनी मामले, वित्त, रक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। चाहे 1989 में बोफोर्स घोटाले की विदेशों में जाकर पड़ताल करनी हो, 2002 में गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देना हो या फिर 2009 से 2014 के दौरान राज्यसभा में बतौर नेता विपक्ष मनमोहन सिंह सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करना, वे हर बार नई ऊर्जा और रणनीति के साथ भाजपा की राजनीति को नई धार प्रदान करते नजर आते। इस साल मई में जेटली ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर स्वास्थ्य कारणों से नई सरकार में कोई जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था।  

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पीएम बोले, मैंने अपना खास दोस्त खो दिया

जेटली का निधन ऐसे वक्त हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे पर अभी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, मैंने खास दोस्त खो दिया, जिन्हें दशकों से जानने का सम्मान मुझे प्राप्त था। मुद्दों पर उनकी समझ बहुत गहरी थी। वह हमें अनेक सुखद स्मृतियों के साथ छोड़ गए। 

उन्होंने देश को आर्थिक मजबूती दी।जेटली ने साहस और गरिमा के साथ लंबी बीमारी से जंग लड़ी। वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि एक प्रतिभाशाली वकील, अनुभवी सांसद और प्रतिष्ठित मंत्री के रूप में जेटली ने राष्ट्र के निर्माण में बड़ा योगदान दिया।

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पीएम ने की जेटली के परिवार से बात

प्रधानमंत्री ने यूएई से ही जेटली की पत्नी संगीता और बेटे रोहन से बात की और उन्हें सांत्वना दी। जेटली के परिवार ने उनसे विदेश दौरा रद्द नहीं करने को कहा। दिल्ली विश्वविद्यालय से छात्र नेता के रूप में राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत करने वाले जेटली सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील भी थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रहे थे।

उनकी गिनती देश के बेहतरीन वकीलों के तौर पर होती रही। 80 के दशक में ही जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण केस लड़े। 1990 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा दिया। वीपी सिंह सरकार में वह अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल का पद संभाला था।

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सॉफ्ट टिश्यू कैंसर समेत कई बीमारियों से थे पीड़ित

जेटली का सॉफ्ट टिश्यू कैंसर का इलाज चल रहा था। वे इस बीमारी के इलाज के लिए 13 जनवरी को न्यूयॉर्क गए थे और फरवरी में वापस लौटे। जेटली ने अप्रैल 2018 में भी दफ्तर जाना बंद कर दिया था। 14 मई 2018 को एम्स में ही उनके गुर्दे (किडनी) प्रत्यारोपण भी हुआ था, वे शुगर से भी पीड़ित थे। सितंबर 2014 में वजन बढ़ने की वजह से जेटली की बैरियाट्रिक सर्जरी भी कराई गई थी।

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