आइए जानते हैं पूरा मामला...
दरअसल 15 वर्षीय रामानंद पासवान का कटक के एक अस्पताल के आईसीयू में इलाज चल रहा था। इस दौरान उसने अपने माता-पिता को एक टीवी कार्यक्रम के दौरान देखा। कमरे में रखे टीवी पर उसने अपने माता-पिता को खुद के लिए परेशान पाया। उसने तत्काल अधिकारियों को संपर्क किया और मदद की गुहार लगाई।
ऐसे हुई मुलाकात
ट्रेन हादसे की खबर मिलते ही बच्चे की तलाश में उसके माता-पिता नेपाल से ओडिशा पहुंचे। लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें बच्चे की खबर नहीं मिली। तभी एम्स, भुवनेश्वर में उनके पास एक टीवी चैनल के कुछ लोग पहुंचे और हालचाल पूछा। उन्होंने नेपाली दंपति की पीड़ा को अपने चैनल को दिखाया। इसी इंटरव्यू को देखकर बच्चे ने अपने परिजन की पहचान की। इसके बाद अस्पताल ने उस लड़के की मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए।
अस्पताल ने ऐसे की मदद
एससीबी मेडिकल कॉलेज के अधिकारी डॉ. बीएन मोहराना ने बताया कि अस्पताल ने टीवी चैनल के कार्यालय को फोन किया, वीडियो के बारे में जानकारी मांगी। रामानंद के माता-पिता के बारे में सही जानकारी पाने के लिए उन्होंने वीडियो कीइ सत्यता जांची। इसके बाद अस्पताल के अधिकारी रामानंद को उसके माता-पिता तक पहुंचाने में सफल हुए।
कैसे हुई घटना?
बता दें कि कोरोमंडल एक्सप्रेस दो जून को शाम 7 बजे के करीब एक मालगाड़ी से टकरा गई थी। इसके बाद ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर गए थे। उनमें से कुछ डिब्बे उस वक्त वहां से गुजर रही बेंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस के पिछले कुछ डिब्बों से टकरा गए। इस भीषण हादसे में 288 लोगों की मौत हुई थी और 1,100 से अधिक घायल हुए थे।