संसद के बुधवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के पहले ही नोट बंदी पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस, राजद, झामुमो, वाम दल, बसपा, टीएमसी, जदयू, एनसीपी समेत 13 दलों ने बैठक कर इस मुद्दे पर एक साथ सरकार पर धावा बोलने का मन बनाया है।
नोट बंदी के कारण आम लोगों को हो रही तकलीफ पर विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार को घेरने के पक्ष में तो हैं, मगर इन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई पसंद नहीं है। यही कारण है कि वाम दलों के बाद कांग्रेस ने भी ममता की अगुवाई में इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति से मुलाकात करने से मना कर दिया है।
हालांकि जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने सभी मुद्दों पर एकजुटता बनाने के लिए बुधवार को विपक्षी दलों की एक और बैठक बुलाने की घोषणा की है, जबकि ममता ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर किसी ने साथ नहीं दिया तो वह बुधवार को अकेले राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगी।
नोट बंदी मामले में सरकार पर एक साथ धावा बोलने की रणनीति बनाने में जुटी कांग्रेस ने सोमवार के बाद मंगलवार को भी कई दलों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई। हालांकि इस बैठक में सपा, एआईएडीएमके और बीजेडी की अनुपस्थिति से सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई। हालांकि जदयू अध्यक्ष सत्र शुरू होने से कुछ देर पहले बैठक से अनुपस्थित दलों को साधने की कोशिश करेंगे।