राष्ट्र को 2 अक्टूबर का महत्व बताते हुए मोदी ने कहा कि 2 अक्टूबर हमारे राष्ट्र के लिए इस दिन का क्या महत्व है, इसे बच्चा-बच्चा जानता है। इस वर्ष का 2 अक्टूबर का और एक विशेष महत्व है। अब से 2 साल के लिए हम महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के निमित्त विश्वभर में अनेक विविध कार्यक्रम करने वाले हैं। 1941 में महात्मा गांधी ने रचनात्मक कार्यक्रम के रूप में कुछ विचारों को लिखना शुरू किया। बाद में 1945 में जब स्वतंत्रता संग्राम ने जोर पकड़ा तब उन्होंने, उस विचार की संशोधित प्रति तैयार की। पूज्य बापू ने किसानों, गांवों, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, स्वच्छता, शिक्षा के प्रसार जैसे अनेक विषयों पर अपने विचारों को देशवासियों के सामने रखा है। इसे गांधी चार्टर भी कहते हैं।
स्वतंत्रता संग्राम में गांधी के योगदान को याद करते हुए पीएम ने कहा, 'महात्मा गांधी के आह्वान पर समाज के हर क्षेत्र, हर वर्ग के लोगों ने स्वयं को समर्पित कर दिया। बापू ने हम सब को एक प्रेरणादायक मंत्र दिया था जिसे अक्सर, गांधी जी का तलिस्मान के नाम से जाना जाता है।' उसमें गांधी जी ने कहा था, 'मैं आपको एक जंतर देता हूं, जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा अहम् तुम पर हावी होने लगे तो यह कसौटी आजमाओ, जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी तुमने देखा हो, उसकी शक्ल याद करो और अपने दिल से पूछो कि जो कदम उठाने का तुम विचार कर रहे हो, वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा। क्या उससे, उसे कुछ लाभ पहुंचेगा! क्या उससे वह अपने ही जीवन और भाग्य पर कुछ काबू रख सकेगा! यानी क्या उससे उन करोड़ों लोगों को स्वराज मिल सकेगा जिनके पेट भूखे हैं और आत्मा अतृप्त है। तब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह मिट रहा है और अहम् समाप्त हो रहा है।'
मन की बात में लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कहते हैं कि लाल बहादुर शास्त्री जी खादी के पुराने या कटे-फटे वस्त्रों को भी इसलिए सहेज कर रखते थे क्योंकि उसमें किसी का परिश्रम छुपा होता है। वे कहते थे ये सब खादी के कपड़े बड़ी मेहनत से बनाए हैं- इसका एक-एक सूत काम आना चाहिए। देश से लगाव और देशवासियों से प्रेम की ये भावना छोटे से कद-काठी वाले उस महा-मानव के रग-रग में रची-बसी थी। दो दिन बाद पूज्य बापू के साथ ही हम शास्त्री जी की भी जयंती मनाएंगे। लाल बहादुर शास्त्री जी की ये विशेषता थी कि बाहर से वे अत्यधिक विनम्र दिखते थे परन्तु भीतर से चट्टान की तरह दृढ़ निश्चयी थे। ‘जय जवान जय किसान’ का उनका नारा उनके इसी विराट व्यक्तित्व की पहचान है।'
मध्यप्रदेश की राजमाता सिंधिया के बारे में पीएम मोदी ने कहा, 'अक्टूबर का महीना हो, जय प्रकाश नारायण जी की जन्म-जयन्ती हो, राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी के जन्म शताब्दी वर्ष का प्रारंभ होता हो- ये सभी महापुरुष हम सब को प्रेरणा देते रहे हैं उनको हम नमन करते हैं और 31 अक्टूबर सरदार साहब की जयंती है, मैं अगली ‘मन की बात’ में विस्तार से बात करूंगा लेकिन आज मैं जरुर इसलिए उल्लेख करना चाहता हूं कि कुछ वर्षों से सरदार साहब की जन्म-जयंती पर 31 अक्टूबर को हिंदुस्तान के हर छोटे-मोटे शहर में, कस्बों में, गांवों में ‘एकता के लिए दौड़’ का आयोजन होता है।'