जिसे रात-दिन भगवान की तरह पूजा और विश्वास किया, उसी ने परिवार की इज्जत से खिलवाड़ किया। ऐसे राक्षसी व्यक्ति के लिए भगवान से आजीवन कारावास की ही सजा मांगी थी और उन्हें कोर्ट पर भी पूरा भरोसा था कि चाहें जितने दिन लग जाएं लेकिन न्याय जरूर मिलेगा।
तीन गवाह मारे गए, कई लापता
इस मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह कृपाल सिंह, वैद्य अमृत प्रजापति और अखिल गुप्ता पर जानलेवा हमले किए गए जिनमें उनकी मौत हो गई। इसके अलावा कई गवाह आसाराम के गुर्गों के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि कई ऐसे गवाह थे, जो गायब हो गए और उनका आज तक लापता हैं।
आसाराम पर इन धाराओं में आरोप साबित हुए और ये मिली सजा
- धारा 376(2)(एफ): आजीवन कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 376डी: आजीवन कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 370(4): 10 वर्ष कठोर कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 342: एक वर्ष का कठोर कारावास, 1000 रुपये जुर्माना।
- धारा 506: एक वर्ष का कठोर कारावास, 1000 रुपये जुर्माना।
- जेजे एक्ट की धारा 23: 6 माह का साधारण कारावास।
जेल की कोर्ट में भी देरी से पहुंचे आसाराम, कहा-क्षमा करना भक्ति में लीन था
आसाराम को फैसला सुनाने के लिए जोधपुर जेल में ही कोर्ट लगाने के बावजूद असाराम ने जज को ही इंतजार करवा दिया और इस कारण सुनवाई देरी से शुरू हुई। सफेद कुर्ता और लाल टोपी पहने आसाराम करीब 9.40 बजे जेल में लगी अदालत पहुंचा और पहुंचते जज को कहा, ‘क्षमा करना, मैं थोड़ा भक्ति में लीन था।’ हालांकि जज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
जेल सूत्रों के अनुसार आसाराम फैसला सुनने के लिए अपने बैरक से निकलने से पहले पूजा करने बैठ गया था। उसे रात को भी नींद नहीं आई और बेचैन रहा। सुबह भी जल्दी उठकर सेल में इधर-ऊधर घूमता रहा।