चीन के नोबल पुरस्कार विजेता व सरकार की नीतियों के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले ल्यू शिआबो का शनिवार को दाह संस्कार कर दिया गया। शिआबो की हिरासत के दौरान हुए कैंसर के बाद पिछले बृहस्पतिवार को मृत्यु हो गई थी। इसी बीच चीन ने बयान दिया है कि ल्यू की पत्नी को गिरफ्तार नहीं किया गया था और वह रिहा थीं लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते उन्हें देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी।
नोबल पुरस्कार पाने वाले और साम्यवादी सरकार की नीतियों के खिलाफ हमेशा आवाज उठाने वाले 61 वर्षीय शिआबो का लिवर कैंसर से लड़ने के दौरान कई अंगों के खराब हो जाने के कारण बृहस्पतिवार को निधन हो गया था। ल्यू के परिवार वालों और दोस्तों ने उत्तरपूर्वी चीन के शेनयांग शहर में अंतिम विदाई दी।
बता दें कि ल्यू को साल 2009 में लोगों को भड़काने के मामले में 11 वर्ष की सजा दी गई और उनकी पत्नी ल्यू जिया को को भी घर में नजरबंद कर दिया गया था। ल्यू की मौत के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चीन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, अमेरिका समेत कई अन्य देशों का कहना है कि 2010 में ल्यू को मिले नोबल पुरस्कार लेने के लिए उनकी पत्नी को विदेश जाने की अनुमति दी जाए।