भारत में लिथुआनिया के राजदूत जूलियस प्रानविक्यिूस ने रविवार को दावा किया कि उनका देश भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का दरवाजा साबित हो सकता है। जूलियस ने कहा, दुनिया की सबसे युवा सरकारों में से एक के नेतृत्व वाला लिथुआनिया भारत के साथ व्यापक आधार वाले संबंध बनाना चाहता है।
राजदूत जूलियस ने कहा कि खासतौर पर लिथुआनिया की निगाहें फिनटेक, जीवन विज्ञान, डिजिटल तकनीक और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उभरते हुए उच्च विकास वाले क्षेत्र में भारत के साथ संपर्क बढ़ाने पर टिकी हैं। इसके लिए उन्होंने अपने देश की तरफ से भारतीय निवेशकों को गतिशील कारोबारी माहौल उपलब्ध कराने की पेशकश भी की।
लिथुआनियाई राजदूत ने कहा, हमारा देश वैश्विक स्तर पर बढ़ते हुए फिनटेक हब के तौर पर उभर रहा है और यूरोप में अपना फैलाव करने की इच्छुक भारतीय कंपनियां इस बाल्टिक देश का उपयोग इस क्षेत्र में बड़े बाजारों के ‘दरवाजे’ के तौर पर कर सकती हैं।
जूलियस ने कहा, प्रधानमंत्री सिमोनाइट के नेतृत्व वाली ‘युवा’ लिथुआनियाई सरकार नई ऊर्जा और दृष्टिकोण के साथ अपना ध्यान आर्थिक विकास के लिए उच्च विकास वाले क्षेत्रों पर केंद्रित कर रही है और भारत के साथ संबंध उसकी उच्च प्राथमिकता में है।
बता दें कि लिथुआनिया शक्तिशाली नाटो समूह के साथ-साथ यूरोपीय संघ का भी सदस्य है और इस प्रमुख बाल्टिक देश में हालिया दिसंबर में गठित नई सरकार की औसत आयु महज 40 साल है।