अतंरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस अपनी 51वीं सालगिरह मना रहा है। तेजी से टेक्नोसेवी होती दुनिया में इंटरनेशनल लिट्रेसी डे 2017 की थीम लिट्रेसी इन डिजिटल वर्ल्ड रखा गया है। इस वर्ष यूनेस्को के हेडक्वार्टर में साक्षरता दिवस दो दिन 7 और 8 सितंबर को सेलिब्रेट किया जा रहा है।
वैश्विक निगरानी रिपोर्ट के अनुसार हर पांच में से एक पुरुष और दो तिहाई महिलाएं अनपढ़ है। जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 82.1 फीसदी पुरुष और 64.4 फीसदी महिलाएं ही साक्षर हैं। साक्षरता का यह आंकड़ा पिछले दस वर्षों में बढ़ा तो है लेकिन इसकी खास बात है कि साक्षरता दर में महिलाओं का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
डिजिटल बनेगा इंडिया तो बढे़गा इंडिया
अतंरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस
अरुणाचल प्रदेश और बिहार में साक्षरता दर फिसड्डी है। जबकि कई वर्षों से केरल और लक्षद्वीप साक्षरता के मामले 93 और 92 फीसदी के साथ अव्वल बना हुआ है। लेकिन अगर इंटरनेशल साक्षरता की दर को देखा जाए तो भारत आज भी दस प्रतिशत पीछे है। 2011 में भारत की साक्षरता दर 74 फीसदी थी जबकि विश्व की साक्षरता दर 84 फीसदी दर्ज की गई थी। इन आंकड़ो के हिसाब से विश्व में सबसे अधिक अनपढ भारत में हैं।
पूरे विश्व में शिक्षा विषय-वस्तु, कार्यक्रम और लक्ष्य के साथ हर वर्ष मनाया जाता है। हर वर्ष यह एक थीम के साथ मनाया जाता है और इस बार की थीम डिजिटल वर्ल्ड है। भारत के प्रधानमंत्री पिछले तीन वर्षों से भारत को डिजिटली सुदृढ बनाने की जुगत में लगे हैं। उन्होंने श्लोगन भी दिया है डिजिटल बनेगा इंडिया तो बढे़गा इंडिया।
भारत सरकार साक्षरता को बढ़ाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान, मिड डे मील, प्रौढ शिक्षा योजना, राजीव गांधी साक्षरता मिशन आदि चलाए तो जा रहे हैं लेकिन इसमें सफलता अभी उस हद तक नहीं मिली है लेकिन बच्चे तेजी से स्कूलों तक पहुंच रहे हैं और आने वाले वर्षों में साक्षरता दर तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के साथ साथ साक्षरता भी देश को विकास की गति देने में अहम योगदान निभाता है।