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एनसीएलएटी ने बिक्री के लिए मांगी आईएलएंडएफएस कंपनियों की सूची

Wed, 06 Feb 2019 07:12 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिवालिया प्रक्रिया के तहत कर्ज समाधान के लिए सरकार को बतानी होगी कंपनियों की वित्तीय स्थिति
  • 91 हजार करोड़ रुपये के कर्ज तले दबा है समूह
  • 334 कंपनियां हैं समूह की जिनमें करीब 50 विदेश में स्थित हैं
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एनसीएलएटी
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विस्तार
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सरकार की ओर से आईएलएंडएफएस की कर्ज समाधान योजना सौंपे जाने के बाद मंगलवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने समूह की कंपनियों की सूची मांगी है। सरकार को 11 फरवरी तक इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर आधारित रिपोर्ट न्यायाधिकरण में सौंपनी होगी जिसके बाद कर्ज चुकाने के लिए उनकी बिक्री पर फैसला किया जाएगा।

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इससे पहले सरकार ने ट्रिब्यूनल के समक्ष दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के तहत कर्ज समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अपील की। इस पर सुनवाई करते हुए एनसीएलएटी ने सरकार को निर्देश दिया कि प्रक्रिया शुरू करने से पहले वह समूह की कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर आधारित रिपोर्ट अगली तारीख पर सौंपे। 

निर्देशों के तहत इन कंपनियों की सूची उनकी वित्तीय हालत के हिसाब से हरे, गेरुआ और लाल तीन भागों में बनाई जाएगी। भारत में पंजीकृत इन कंपनियों की सूची इसी क्रम से सौंपी जाएगी। जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीठ ने समूह की विदेश में स्थित कंपनियों का भी ब्योरा मांगा है।
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वाटरफाल सिस्टम से होगा बंटवारा

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने पीठ को बताया है कि आईबीसी के तहत कर्ज समाधान के लिए संपत्तियों का मुद्रीकरण वाटरफाल सिस्टम से किया जाएगा, जिसमें कर्जदाताओं की वरिष्ठता का ध्यान रखना होता है। आईबीसी की धारा-53 के तहत बिक्री का बंटवारा वाटरफाल सिस्टम से किया जाता है। इसमें सबसे पहले बड़े और सुरक्षित कर्जदाताओं का पैसा चुकाया जाता है और शेष राशि अनुषंगी कर्जदाताओं को जाती है। आखिर में इक्विटी धारकों को इसका भुगतान किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे निगरानी

मंत्रालय ने ट्रिब्यूनल से अपील की है कि समूची प्रक्रिया की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डीके जैन को नियुक्त किया जाए। उनकी देखरेख में ही नियम व शर्तों पर चर्चा के साथ मासिक शुल्क, यात्रा खर्च व अन्य अलाउंस का निर्धारण किया जाना चाहिए। समाधान योजना के तहत समूह के नवगठित बोर्ड द्वारा मान्य किए गए अनुकूल और योग्य मानदंडों को लागू किया जाए। बिक्री पर आखिरी फैसला एनसीएलएटी ही करेगा।
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ऐसे होगा कंपनियों का बंटवारा

-समूह की ऐसी कंपनियां जो अपने भुगतान दायित्वों का पालन कर रही हैं, उन्हें हरे श्रेणी में रखा जाएगा।
-जो कंपनियां सिर्फ अपने संचालन संबंधी भुगतान का निपटारा करती हैं, उन्हें गेरुआ श्रेणी में रखा गया है।
-लाल श्रेणी में उन कंपनियों को रखा गया है जो अपने बड़े और प्रमुख कर्जदाताओं को भी भुगतान नहीं कर रही हैं। 

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