सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से 'कट मनी' (कमीशन) लिए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। मामला सामने आने के बाद अब पता चला कि कट मनी के लिए एक सूची भी बनी हुई है। जिसमें हर योजना के लिए कितने पैसे लिए जाएं, ये तय किया गया है। इस सूची में आवास योजना और मनरेगा तक को शामिल किया गया है।
कट मनी एक तरह का कमीशन होता है, जो स्थानीय सरकारी परियोजनाओं या कल्याणकारी योजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि में से लाभार्थी को देते समय काट लेते हैं। इसके इलावा टीएमसी नेताओं पर किसी सरकारी मंजूरी देने के एवज में भी 'कट मनी' लेने के आरोप लगे हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि पश्चिम बंगाल में कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से 'कट मनी' स्वीकार करने वाले निर्वाचित जन प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को अब एक कड़े कानून के तहत आरोपी बनाया जाएगा, जिसमें दोषी ठहराए जाने पर आजीवन कारावास का प्रावधान है।
रिपोर्ट के अनुसार करीब 12 गांवों के लोग इस 'कट मनी' से परेशान हैं। कट मनी की शुरूआत 200 रुपये से होती है, और ये 25 हजार रुपये तक है। इन लोगों का कहना है कि हालात ऐसे हैं कि जो लोग अपने किसी रिश्तेदार का अंतिम संस्कार करवाते हैं, उनको तक नहीं बख्शा जाता। राज्य सरकार की समाबयाथी योजना के तहत अंतिम संस्कार और उससे जुड़े अन्य कामों के लिए दो हजार रुपये तक की मदद पहुंचाई जाती है। इसमें भी कट मनी के तौर पर लोगों से 200 रुपये तक लिए जाते हैं।
ये पैसे लेने का खेल यहीं खत्म नहीं होता। विभिन्न प्रकार की योजनाओं के लिए कट मनी निर्धारित की गई है। जैसे-
- उज्जवला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन- प्रत्येक लाभार्थी से 500 से 600 रुपये तक लेना।
- बंगलार बारी (प्रधानमंत्री आवास योजना)- घर बनाने के लिए 1.20 लाख से 1.35 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रत्येक लाभार्थी से 10-25 हजार रुपये तक कट मनी के तौर पर लेना।
- निर्मल बांगला (स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण)- शौचालय के लिए 12 हजार रुपये की सहायता देने के लिए कट मनी के तौर पर 900 से 2 हजार रुपये प्रत्येक लाभार्थी से लेना।
- मनरेगा- ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत आने वाले लोगों से 20 से 40 रुपये प्रतिदिन लेना। लाभार्थियों के अकाउंट में आने के बाद पैसा पर्यवेक्षक लेता है।