एजेंसी / नई दिल्ली। राजमार्गों पर शराब बेचने पर लगी पाबंदी के बाद अब राज्य सरकारें इसकी तोड़ निकालने में जुट गई हैं। कुछ राज्य सरकारों ने अब राजमार्गों को ही डीनोटिफाई करने का रास्ता अख्तियार किया है। जबकि कुछ ने छूट हासिल करने के लिए कोर्ट का रास्ता तलाशना शुरू किया है। राजमार्गों पर शराब बिक्री बंद करने की पाबंदी के बाद हॉस्पेटिलिटी (होटल, रेस्तरां आदि) इंडस्ट्री चिंता में है। राज्य सरकारों को राजस्व घटने की चिंता सता रही है।
केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि उन्हें कुछ राज्यों से कई बार अनुरोध मिले हैं। ये राज्य चाहते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्गों को डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया जाए ताकि राज्यों को राजस्व का घाटा न हो।
कुछ दूसरे राज्य शराबबंदी के आदेश के खिलाफ कोर्ट भी जाने का मन बना रहे हैं। इन राज्यों में गोवा शामिल है। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के पास इस मामले में सटीक स्पष्टीकरण (आदेश पर) और संभवत: गोवा के लिहाज से फैसले पर पुनर्विचार के लिए जा सकते हैं।
केरल भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध कर सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन राज्यों की आबकारी नीति का अध्ययन करने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी बनाई है, जहां शराब पर पाबंदी है या फिर निगरानी में शराब बेची जा रही है। राज्यों में सड़कों के कुछ हिस्सों को डी-नोटिफाई किया जा चुका है।