अब गिर से बाहर भी बसे शेर
गुजरात के वन विभाग के प्रमुख चीफ कंजर्वेटर जयपाल सिंह ने बताया कि गिर नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में 384 शेर पाए गए, जबकि 507 शेर पार्क के बाहर के इलाकों में गिने गए। इसका मतलब है कि अब शेरों की संख्या गिर के बाहर तेजी से बढ़ रही है।
शेरों को अब सौराष्ट्र के इन 11 जिलों में देखा गया
- जूनागढ़
- गिर सोमनाथ
- भावनगर
- राजकोट
- मोरबी
- सुरेंद्रनगर
- देवभूमि द्वारका
- जामनगर
- अमरेली
- पोरबंदर
- बोटाद
यह भी पढ़ें -
Video: मां से बढ़कर कोई नहीं! शेर ने किया बच्चों पर हमला, फिर शेरनियों का रौद्र रूप देखकर अकड़ पड़ गई ढीली
इन संरक्षित क्षेत्रों में भी दिखे शेर
गिर के अलावा, शेर इन संरक्षित क्षेत्रों और जंगलों में भी देखे गए।
- पानिया सैंक्चुरी
- मितियाला सैंक्चुरी
- गिरनार रिजर्व
- बारडा सैंक्चुरी (यहां 17 शेर गिने गए, पोरबंदर से 15 किमी दूर)
इसके अलावा कुछ शेर तटीय क्षेत्रों और खुले मैदानी इलाकों में भी देखे गए। भावनगर जिले में एक झुंड (प्राइड) में सबसे ज्यादा 17 शेर पाए गए।
कैसे हुई शेरों की जनगणना?
- फोटो : Freepik
कैसे हुई यह जनगणना?
यह 16वीं एशियाई शेर जनगणना थी। इसे 10 से 13 मई के बीच किया गया। इसका क्षेत्रफल 35,000 वर्ग किलोमीटर था, जिसमें 11 जिलों के 58 तालुका कवर किए गए। इसमें करीब 3,000 स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया- जिनमें वन विभाग के अधिकारी, जोनल इंचार्ज, गिनतीकर्ता और निरीक्षक शामिल थे।
यह भी पढ़ें -
Sawai Madhopur News: दर्दनाक हादसों के बाद भी नहीं चेता वन विभाग, बाघों के नजदीक पहुंचकर युवक ने बनाए वीडियो
नया तरीका: 'डायरेक्ट बीट वेरिफिकेशन'
इस बार जनगणना एक नई और अधिक सटीक पद्धति से की गई जिसे कहा जाता है। 'प्रत्यक्ष बीट सत्यापन' इसमें हर शेर के देखे जाने का समय, दिशा, लिंग, उम्र, शारीरिक निशान, और जीपीएस लोकेशन रिकॉर्ड की गई। इसके साथ ही हाई-टेक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ जैसे- कैमरा ट्रैप्स, हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, रेडियो कॉलर - इस तरीके से लगभग 100% सटीकता और शून्य गलती का दावा किया गया है।
जनसंख्या बढ़ने के क्या मायने हैं?
यह अच्छी खबर है कि एशियाई शेरों की संख्या में इजाफा हो रहा है, क्योंकि ये दुनिया में केवल गुजरात के गिर क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। शेरों का नए इलाकों में फैलना उनके लिए सुरक्षित जगहों की जरूरत को दिखाता है। वन विभाग को अब उन नए क्षेत्रों में भी शेरों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के उपाय करने होंगे। वहीं शेरों की बढ़ती संख्या से यह भी साबित होता है कि वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से शेरों की सुरक्षा में बड़ी सफलता मिली है। लेकिन साथ ही, अब चुनौती यह है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए उनके लिए नई सुरक्षित जगहों, खाद्य स्रोतों, और प्राकृतिक आवास की व्यवस्था की जाए ताकि शेरों और इंसानों के बीच किसी भी तरह का संघर्ष न हो।