बात 10 मई 2007 की है। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम संसद सत्र को संबोधित कर रहे थे। स्वामी शिवकुमार की 100वीं जन्म शती समारोह और लिंगायत मठ के 300 साल पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- 'मैंने ईश्वर को देखा है। साक्षात अपनी आंखों के सामने। उस व्यक्ति को देने में खुशी मिलती है।
शरीर और आत्मा में आपको देने के लिए सब कुछ है। यदि आपके पास ज्ञान है, तो उसे साझा करें। संसाधन है, तो जरूरतमंदों के साथ बांटे। अपने दिल का इस्तेमाल दूसरों के दुख-दर्द को दूर करने और उन्हें खुशी देने के लिए करें।
अगर आपको देने में खुशी मिलती है, तो ईश्वर आपके सभी कार्यों को आशीर्वाद देंगे। मैंने यह सब कुछ अपनी आंखों के सामने स्वामीजी को करते देखा है। उन्होंने लोगों को सिर्फ दिया। उन्हें हमेशा ईश्वर का आशीर्वाद मिलेगा। इसलिए वे जीवित भगवान हैं।' संसद में उन्होंने स्वामीजी पर लिखी अपनी कविता भी सुनाई।
कर्नाटक के रामनगर जिले के वीरपुरा गांव में जन्मे लिंगायत-वीरशैव समुदाय के शिवकुमार स्वामी को 2015 में पद्म भूषण से नवाजा गया था। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और कई सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने जीते जी लोगों के दुख-दर्द बांटे, गरीबों को मुफ्त शिक्षा और रहने के लिए घर उपलब्ध करवाए।
- जन्म: 1 अप्रैल 1907
- मृत्यु: 21 जनवरी 2019
10 हजार बच्चों को शिक्षा और रहना-खाना फ्री में
मठ की ओर से 10 हजार बच्चों को रोजाना मुफ्त भोजन और उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। मठ 150 से ज्यादा शिक्षण संस्थाएं चला रहा है। इनमें इंजीनियरिंग कॉलेज भी हैं। कर्नाटक के 30 जिलों में लिंगायत मठ का प्रभाव है। इस समुदाय के वोटरों का हिस्सा 18% है और 100 से ज्यादा सीटों पर इनका सीधा प्रभाव है।