कर्नाटक की कांग्रेस सरकार धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है। अगर केंद्र सरकार ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग मान ली तो समुदाय की अनुसूचित जातियों से आरक्षण का लाभ छिन जाएगा।
कर्नाटक सरकार ने सोमवार को लिंगायत को अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा देने का प्रस्ताव मंजूरी कर केंद्र सरकार के पास भेजा था। भाजपा इस फैसले का विरोध कर रही है। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, नवंबर 2013 में मनमोहन सरकार ने फैसला लिया कि अलग धर्म का दर्जा देने से समाज बंट जाएगा और इसकी अनुसूचित जातियों पर भी असर पड़ेगा।
14 नवंबर, 2013 को भारत के महा रजिस्ट्रार ने भी एक सवाल के जवाब में कहा था कि लिंगायत हिंदू धर्म का ही एक वर्ग है। इसलिए जनगणना में इसे अलग कॉलम नहीं दिया जा सकता है।
मेघवाल ने कहा, कर्नाटक ने यह फैसला सिर्फ इसलिए लिया है कि वह भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने से रोकना चाहती है। इस मामले में भाजपा का पक्ष साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। वहीं संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने भी कहा कि अगर अलग धर्म का दर्जा मिला तो लिंगायत का अनुसूचित समुदाय अपने अधिकार खो देगा।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने इस मामले पर सिद्धारमैया सरकार को निशाने पर लिया था। एक पुरानी घटना का हवाला देते हुए उन्होंने लिखा कि अगस्त 2014 में महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार ने ऐसा ही फैसला लिया था लेकिन केंद्र में बैठी यूपीए सरकार ने पृथ्वीराज चौहान सरकार का यह फैसला ठुकरा दिया था। क्या
सिद्धारमैया इस बात को नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार का यह फैसला हिंदुओं को बांटने वाला है।
दरअसल बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से ताल्लुकात रखते हैं। इसे बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। अब इसी वोटबैंक में कांग्रेस सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। उनका यह फैसला बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। लिहाजा इस मामले पर सियासी वार-पलटवार शुरू हो गया है।
वहीं
राज्य में सिद्धारमैया सरकार के इस ऐलान के बाद लिंगायत और वीरशैव समुदायों के बीच हिंसा हो गई। राज्यसरकार के इस फैसले के बाद दोनों वर्ग के लोग जश्न मनाते हुए कुलबर्गी पहुंचे थे। वहीं पर इनका टकराव हो गया। मान्यता है कि वीरशैव समुदाय के लोग भी लिंगायत ही हैं लेकिन लिंगायत समुदाय उन्हें अलग मानता है। बता दें कि कैबिनेट के फैसले के बाद यह समुदाय आधिकारिक रूप से हिंदू धर्म से अलग हो जाएगा।