कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चूंकि वीरशैव समुदाय के लोग भगवान शिव की पूजा उसी तरह से करते हैं जैसे हिंदू करते हैं और वो वेद और पुराण पर भी विश्वास रखते हैं। ऐसे में कमेटी ने वीरशैव समुदाय को इसमें शामिल नहीं करने की सिफारिश की।
वहीं गुरु बासवन्ना के वचनों को मानने वाले लिंगायत, जो मूर्ति की पूजा नहीं करते हैं, उन्हें अलग धर्म का मानते हुए अल्पसंख्यक दर्जा देने की सिफारिश की गई। फोरम ऑफ लिंगायत महाधिपति के संयोजक डॉक्टर एसएम जामदार ने बीबीसी को बताया कि फैसला साफ़ है- बासवन्ना के बताए वचनों पर चलने वाले लिंगायत मठों के सभी मठाधीशों ने एक राय के साथ कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की है।
इससे पहले जगतगुरु माते महादेवी ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि उनका समाज मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पहल का स्वागत करता है। उनका कहना था कि पिछले तीन सौ सालों से लिंगायत खुद को हिंदुओं से अलग पहचान को लेकर संघर्ष कर रहे थे।
बंगलूरूमें आयोजित महाधिपतियों की इस बैठक में कर्नाटक के विभिन्न इलाक़ों से लिंगायत मठाधीश जमा हुए थे। हालांकि इस घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी ने औपचारिक रूप से कुछ नहीं कहा है लेकिन पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह मठों में घूम घूमकर लिंगायत मठाधीशों से चुनावों में समर्थन की अपील करते आ रहे हैं। वैसे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता इस ताजा घोषणा के बाद बैठक कर रहे हैं कि उनकी आगे की रणनीति क्या होगी।