कर्नाटक में लिंगायत और वीरशैव अनुयायियों की बीच हिंसा की खबर है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वार लिंगायत और वीरशैव लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने पर यह हिंसा हुई।
मान्यता है कि वीरशैव समुदाय के लोग भी लिंगायत ही हैं लेकिन लिंगायत समुदाय उन्हें अलग मानता है। राज्य सरकार के फैसले पर जश्न मनाने के लिए दोनों धड़े कलबुर्गी एकत्रित हुए थे। इस दौरान दोनों धड़े आपस में भिड़ गए।
बता दें कि कैबिनेट के फैसले के बाद यह समुदाय आधिकारिक रूप से हिंदू धर्म से अलग हो जाएगा। कांग्रेस चुनाव से पहले यह फैसला लेकर लिंगायत समुदाय को लुभाना चाहती है। उधर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एस प्रकाश ने इसे चुनावी रेवड़ी करार दिया है।
कैबिनेट की बैठक के बाद कानून मंत्री टीबी जयचंद्र ने कहा, कैबिनेट ने राज्य की ओर इस मुद्दे पर गठित विशेषज्ञ कमेटी की सिफारिश मंजूर कर ली। काफी बहस और विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है।
विशेषज्ञ समिति के मुताबिक लिंगायत समुदाय के लोग 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक बासवेश्वर या बासवन्ना के विचारों को मानते हैं। जयचंद्र के मुताबिक इस फैसले से बाकी अल्पसंख्यकों के अधिकार और हितों पर असर नहीं पड़ेगा।