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जिंदगी मांगती है तिरंगा : सड़क किनारे राष्ट्रध्वज बेचने वाले लोगों के लिए आखिर क्या हैं इसके मायने

Sun, 14 Aug 2022 06:21 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

मैं मनोज हूं। देवरिया घर है मेरा। पिछले 20 साल से 15 अगस्त के समय में दुकान खोली है और झंडा बेच रहा हूं, लेकिन इस साल के जैसा माहौल कभी नहीं देखे थे। बेचते हुए भी तिरंगे के सम्मान का भी ख्याल रखता हूं।
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तिरंगा झंडा बनाता कारीगर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक जोश है, क्योंकि दिल में ‘हर घर तिरंगा’ है। आपने भी अपने शहर या कस्बे में सड़क किनारे तिरंगा बेच रहे लोगों को देखा होगा। उनसे पूछकर देखिए, ये तीन रंग उनके जिंदगी के रंग हैं।

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जोश में हम भी हैं
सुनील कुमार सिंह नाम है मेरा। मूल रूप से अयोध्या का रहने वाला हूं, श्री रामचंद्र जी के वंश का हूं मैं। रोजगार के लिए अयोध्या से बाहर निकला। अब मैं गाजियाबाद के कनावनी गांव में रहता हूं और नोएडा में पिछले कई दिनों से तिरंगा बेच रहा हूं। इन दिनों मौसम है तो तिरंगा बेच रहा हूं। हमें पांच-दस रुपए बचते हैं। इसके अलावा हम सुबह पेपर डालते हैं। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो 100 रुपए के तिरंगे के लिए 500 रुपए तक देकर जाते हैं। कई लोग खूब मोल-भाव करते हैं। वे लोग 100 रुपए की चीज 10 में खरीदना चाहते हैं। ‘हर घर तिरंग’ का जोश है। मुझे लगता है, उस जोश में कुछ हिस्सा मेरा भी है। लोगों की गाड़ियों पर लगे तिरंगे को देखकर मन खुश हो जाता है। मन में ‘जय हिंद जय भारत’ आ जाता है।

झंडा हमेशा ऊंचा रहे
मेरा नाम साजन है। हम लोग राजस्थान से आए हैं। अभी के लिए यह काम करते हैं। छोटी सी लूना ही हमारी दुकान है। इस पर ही सारा सामान लेकर चलते हैं। मैं ग्रेटर नोएडा इलाके में तिरंगा बेचता हूं। यहां कई रिश्तेदार भी हैं हमारे। सब यही काम कर रहे हैं। इसके अलावा चाट-पापड़ी बेचते हैं। लोग तिरंगा खरीदने आते हैं तो कई बार दाम कम करवाने के लिए झगड़ा भी करने लगते हैं। तब अजीब लगता है, जबकि हम लोग बहुत कम लाभ पर तिरंगा देते हैं। राजस्थान से लेकर दिल्ली तक लोगों के दिलों में 15 अगस्त का दिन बहुत बड़ा है। यह बिक्री तो 15 अगस्त तक की ही है। अलग-अलग तरह के झंडे खरीदने के लिए लोग आते हैं, चार पहिया गाड़ी वाले, गाडियों के अंदर और बाहर दोनों तरफ तिरंगा लगवाते हैं। गाड़ियों के बोनट पर भी लोग झंडा लगाने के लिए कहते हैं। मैं चाहता हूं, मेरे देश का झंडा हमेशा ऊंचा रहे।
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आपकी देशभक्ति के साथ
दीपक नाम है मेरा। गाजियाबाद का रहने वाला हूं। दूसरा धंधा भी है हमारा, लेकिन झंडे की बिक्री से कुछ दिन का काम चल जाता है। इंदिरापुरम में इन दिनों तिरंगा बेच रहा हूं। घर में कोई नहीं है तो बच्ची को भी साथ लेकर आना पड़ता है। लोग आते हैं अपनी गाड़ियों पर तिरंगा लगवाते हैं। इस बार घर के लोग ज्यादा खरीद रहे हैं। वे बड़े झंडे लेकर जाते हैं। गाड़ी के लिए लोग छोटे झंडे लेते हैं। देश भक्ति की भावना तो सभी में होनी चाहिए। कुछ लोग तो पूरे पैसे दे देते हैं, लेकिन कुछ लोग दाम कम कराने लगते हैं। कोई कहता है कि 60 का 50 में दे दो तो कोई कहता है कि 35 में ही दे दो। बच्चे ज्यादा जिद करते हैं। कई बार बच्चों के लिए दाम कम भी कर देता हूं। ढेर सारे लोग सेल्फी लेने के लिए भी तिरंगा लेते हैं। लेकिन ये भी बुरी बात नहीं लगती हमें। कुछ देरे के लिए ही सही, देशभक्ति तो बाहर निकलती है। तिरंगे से प्यार तो होता है।

हम तो खुश हैं
मेरा नाम दीपचंद है। गोरखपुर का रहने वाला हूं। यहां हर साल हमारी झंडे की दुकान लगती है। इस साल प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि हर घर में तिरंगा लगेगा तो लोग लगा भी रहे हैं। पहले स्कूल के लोग इस दिन ज्यादा तिरंगा खरीदते थे। इस बार भी बच्चे छोटे-छोटे तिरंगे लेने आ रहे हैं। उनके मन में एक जोश है। वैसे इस साल हर कोई तिरंगा खरीद रहा है। सुबह छह बजे से ही दुकान खोल देते हैं। तिरंगे की ऐसी बिक्री अभी तक नहीं देखे थे। मांग बहुत ज्यादा है। हमें बहुत खुशी है यह देखकर कि लोग अपने देश से कितना प्यार करते हैं। गोरखपुर में तो सब जगह तिरंगा ही तिरंगा है, शायद इसलिए भी कि इस जगह का आजादी की लड़ाई में बहुत योगदान है।

मेरे दिए झंडे आपके घर तक
मैं मनोज हूं। देवरिया घर है मेरा। पिछले 20 साल से 15 अगस्त के समय देवरिया में झंडा बेच रहा हूं, लेकिन इस साल के जैसा माहौल कभी नहीं देखे थे। बेचते हुए तिरंगे के सम्मान का भी ख्याल रखता हूं। हर साल हम लोग 5-6 दिन पहले ही दुकान लगाते थे, लेकिन इस साल महीना भर पहले से ही दुकान लगाए हैं। खूब बिक रहा है। हर घर झंडे का अभियान दिख रहा है। लोगों में बहुत उत्साह है और खुशी है। सभी इस त्योहार को मनाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि हर घर में तिरंगा पहुंचे। हम बहुत खुश हैं कि हमारे दिए झंडे लोगों के घर तक पहुंच रहे हैं।

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