मालेगांव ब्लास्ट केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित पहली बार सेना की वर्दी में नजर आए। दरअसल, मालेगांव ब्लास्ट के आरोप में लगभग 9 साल जेल में गुजारने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित रिहा किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पुरोहित को जमानत पर रिहा किया है।
Lieutenant Colonel Shrikant Prasad Purohit dons uniform for the first time after being granted bail by SC in 2008 Malegaon bomb blast case. pic.twitter.com/vyo23mRAgR
— ANI (@ANI) August 30, 2017
बता दें कि 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 79 घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट के पीछे कथित तौर पर कुछ 'हिन्दुवादी संगठनों' का हाथ है। इस केस के बाद ही सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
पुणे में जन्में श्रीकांत पुरोहित का जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ। श्रीकांत के पिता बैंक में नौकरी करते थे उनकी एजुकेशन पुणे में ही हुई। 1994 में पुरोहित को मराठा लाइट इन्फेन्ट्री के लिए सलेक्ट किया गया था। जम्मू-कश्मीर में काम करते वक्त वो बीमार हो गए, जिस वजह से उन्हें मेडिकली डाउनग्रेड कर दिया गया। इस वक्त उन्हें मिलिट्री इंटेलीजेंस में शिफ्ट किया गया।
2002 और 2005 के बीच जम्मू-कश्मीर में पुरोहित बेहद महत्वपूर्ण आतंक-विरोधी ऑपरेशन का हिस्सा बने। इस वक्त उन्हें MI-25 इंटेलीजेंस फील्ड सिक्योरिटी यूनिट में तैनाती मिली। इस यूनिट की जिम्मेदारी बॉर्डर के आस-पास दुश्मन पर नजर रखना होता है। कहा जाता है कि नासिक के नजदीक दिओली में लाइसन यूनिट ऑफीसर रहते वक्त वो रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय के संपर्क में आए।
कहा जाता है कि उपाध्याय ने एक अतिवादी हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत बनाया, जिसके पुरोहित बाद में हिस्सा बने। उपाध्याय भी मालेगांव केस में जेल में हैं। पुरोहित पर ये भी आरोप लगे कि उन्होंने सेना का 60 किलो आरडीएक्स भी चुराया था, जिसमें से कुछ का इस्तेमाल मालेगांव ब्लास्ट में किया गया।
उनपर हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत को फंडिंग और समूह के लोगों की ट्रेनिंग कराने का भी आरोप लगा। पुरोहित जब आर्मी एजुकेशन कॉर्प्स ट्रेंनिंग कॉलेज सेन्टर पंचमढ़ी, मध्यप्रदेश में तैनात थे और अरबी सीख रहे थे, उस वक्त पुलिस ने कुछ एसएमएस को डिकोड किया जो कि मालेगांव ब्लास्ट के बाद पुरोहित की तरफ से उपाध्याय को भेजे गए थे।
जिसके बाद उन्हें मामले में पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। श्रीकांत उस वक्त से जेल में ही थे।