लोगों को उनके घर के पास डाकघरों के जरिये जल्द पासपोर्ट उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की योजना खटाई में पड़ सकती है। इस सेवा में पहले से भूमिका निभा रही निजी कंपनी ने डाकघरों में पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले जाने की घोषणा पर आपत्ति जताई है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (टीसीएस) ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि ऐसा करना सार्वजनिक-निजी भागीदारी के करार की शर्तों में शामिल नहीं है। नई योजना आने पर उसकी लागत बढ़ेगी और उसकी आय प्रभावित होगी।
टीसीएस ने करार के तहत अब तक 60 पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले हैं। इसे 2008 में एक हजार करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था। तब से यह देश के विभिन्न शहरों में पासपोर्ट बनाने, उसमें बदलाव समेत अन्य सेवाएं दे रही है। इसके बाद सरकार ने डाकघरों में नए पासपोर्ट सेवा केंद्र शुरू करने की घोषणा की, जिस पर कंपनी ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर टीसीएस ने विरोध जताया है।
कंपनी ने कहा है कि वह मंत्रालय के डाकघरों में पासपोर्ट केंद्र खोलने के निर्णय पर चिंतित है। करार होने से पहले के दस्तावेजों में स्पष्ट था कि अगर किसी अन्य निकाय को भविष्य में इसमें शामिल किया जाएगा तो वह सिर्फ पासपोर्ट पोर्टल के लिए अपनी सेवाएं मुहैया कराएगा। ऐसे में देशभर के डाकघरों में पासपोर्ट केंद्र खोलना करार की शर्तों के खिलाफ होगा। टीसीएस ने नई योजना को अंजाम देने की सूरत में विदेश मंत्रालय से करार बदलने की मांग की है।