आलोक वर्मा और ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर पर लगाया था छवि खराब करने का आरोप...
अस्थाना के मुताबिक, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और ईडी के ज्वॉइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह सहित कई दूसरे अफसर मेरी छवि खराब करने में लगे थे। आरोप है कि इन अफसरों ने मेरे खिलाफ मीडिया में कई तरह के दस्तावेज लीक किए हैं।
24 सितंबर को लिखे पत्र में अस्थाना ने कहा, मेरे खिलाफ चल रहे इस दुष्प्रचार के माहौल में मैं अपनी डयूटी पूरी नहीं कर सकता। आलोक वर्मा मेरा करियर नष्ट कर देना चाहते हैं। अस्थाना ने लिखा है कि यह भी अंदेशा है कि वे मुझे किसी झूठे केस में फंसवाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि मैं इस वक्त कई बड़े एवं संवेदनशील केसों की जांच कर रहा हूं, इसलिए वे मुझे जानबूझकर प्रताड़ित करने में लगे हैं।
वर्मा ने स्टरलिंग बायोटेक मामले में भी सीबीआई की कार्यप्रणाली को ताक पर रखकर मेरे खिलाफ रोविंग इंक्वायरी शुरू करा दी। इसके अलावा मुझे सीबीआई में ही कुछ बड़े अफसरों की संदिग्ध गतिविधियां साफ तौर पर नजर आ रही हैं। लिहाजा सीबीआई जैसे बडे संगठन में टॉप बॉस की गतिविधियों पर नजर रखने के कोई मेकेनिज्म भी नहीं है, इसलिए आप इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
राकेश अस्थाना के गंभीर आरोप...वर्मा का इशारा था कि आरोपी सतीश बाबू सना को गिरफ्तार न किया जाए
- - मोईन कुरैशी मामले में जांच अधिकारी, एसआईटी के एसपी और ज्वॉइंट डायरेक्टर ने सतीश बाबू सना की गिरफ्तारी के लिए सिफारिश की थी।स्पेशल निदेशक अस्थाना ने भी इस फाइल पर अपनी मुहर लगाकर इसे 20 सितंबर को निदेशक आलोक वर्मा के पास भेज दिया।वर्मा ने सीबीआई के तय नियमों का उल्लंघन कर इस फाइल को कानूनी मामलों के निदेशक ओपी वर्मा
- के सुपुर्द कर दिया।उसमें वर्मा ने कुछ लाइनें भी लिखी, जिनका साफ मतलब था कि सतीश को गिरफ़्तार न किया जाए।
- - वर्मा इन सात केसों में भी गलत इरादे से हस्तक्षेप कर रहे थे....
- - अस्थाना ने सीवीसी और कैबिनेट सचिव से अपील की थी कि सीवीसी सीधे तौर पर इन केसों की निगरानी करे या फिर इनकी जांच के लिए नई एसआईटी बनाई जाए।इनमें संदेसरा ग्रुप आईटी अॉफिशियल, संदेसरा ग्रुप बीएस-एफएस नई दिल्ली, उपेंद्र राय एवं अन्य, राकेश तिवारी एवं अन्य, दीपेश चांडक एवं अन्य, ईओ-2 शाखा के अज्ञात अधिकारी आदि मामले शामिल हैं।
- - आलोक वर्मा ने मोईन कुरैशी मामले में सतीश बाबू सना की पूरी मदद की है। सीबीआई निदेशक से बातचीत होने के बाद सतीश आठ मार्च 2018 और पांच जून 2018 को नोटिस मिलने के बावजूद जांच में शामिल होने के लिए सीबीआई मुख्यालय नहीं आया।
- - आरोप है कि वर्मा ने बीएनआर होटल केस, जो कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ दर्ज हुआ था, के मुख्य संदिग्ध को एफआईआर से बाहर करा दिया। खास बात है कि आरोपी का नाम एफआईआर में शामिल करने के लिए आईओ, एसपी, डीआईजी, जेडी और एडीशनल डायरेक्टर सीबीआई ने भी सिफारिश की थी।
- - अस्थाना ने अपने पत्र में लिखा है कि वर्मा ने सतीश बाबू को इस केस में राहत देने के लिए उससे दो करोड़ रुपये लिए हैं। बदले में उसकी गिरफ़्तारी नहीं हुई और पूछताछ में भी छूट मिल गई।
- - सीबीआई निदेशक वर्मा ने ईडी के अधिकारी एनबी सिंह को काफी राहत दी है। पूछताछ के दौरान उसका मोबाइल फ़ोन तक नहीं लिया गया।
- - बीएसएफ के डीजी केके शर्मा की सिफारिश पर आईपीएस राजीव कृष्णा को सीबीआई में लिया गया।उनकी पत्नी मीनाक्षी आईआरएस अधिकारी हैं और ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह की बहन हैं।
- - अस्थाना का आरोप है कि दिल्ली के पुलिस आयुक्त रहते हुए वर्मा ने सोने की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी, यह एयरपोर्ट का मामला है।
- - 30 जनवरी 2018 को सीबीआई ने बीएसएफ के एक कमांडेंट के खिलाफ पशु तस्करी का केस दर्ज किया था।सीबीआई ने कमांडेंट जेबू डी मैथ्यू के पास से 45.65 लाख रुपये भी बरामद कर लिए।जांच में सामने आया कि यह राशि उसने बांग्लादेश के पशु तस्करों से ली है।वर्मा ने बीएसएफ के अफसर का पूरा बचाव किया।
- - हरियाणा के नागली उमरपुर और टिगरा उल्लावास में जमीन अधिग्रहण केस में 36 करोड रुपये की कथित तौर पर घूस दी गई थी।बताया गया है कि इस मामले से जुड़े अधिकारी टीसी गुप्ता, कंपनी मालिक ललित गुप्ता, सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार और डायरेक्टर आलोक वर्मा के बीच कथित तौर पर जबरदस्त लाइजनिंग रही है।