सिकंद्राबाद गांव के समीप रविवार को कुंए में गिरने के बाद कैद किया गया तेंदुआ आधी रात के बाद भाग निकला और उसकी सुरक्षा में तैनात वन और पुलिसकर्मी सोते रहे। उनकी नींद उस वक्त टूटी, जब भागते वक्त तेंदुआ ने दहाड़ लगाई। लेकिन तब तक वह उनकी पहुंच से बाहर हो चुका था। घटना से एक बार फिर ग्रामीण दहशत में आ गए हैं।
तेंदुआ रविवार सुबह में ग्रामीणों द्वारा खदेड़े जाने के बाद मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव सिकंदराबाद निवासी रामधुन के खेत में पीपल पेड़ के सटे कुंए में गिर गया था। ग्रामीणों ने ही मशक्कत कर कुंए के ऊपर लोहे की किवाडें और मोटी लकड़ियों को रखकर तेंदुआ को अंदर ही कैद कर दिया था।
वन विभाग की योजना थी कि उसे सोमवार सुबह में रेस्क्यू कर कब्जे में ले लिया जाएगा। अफसरों ने तेंदुआ पर नजर रखने के लिए मुजरिया थाने के दरोगा राजेंद्र सिंह के साथ तीन पुलिस कर्मी और वन विभाग के दरोगा के साथ तीन वन कर्मियों को लगाया था।
राजेंद्र सिंह ने बताया कि रात में एक बजकर 38 मिनट पर तेंदुआ की दहाड़ सुनाई दी। पुलिस कर्मियों ने कुंए में टार्च डाली, तो अंदर तेंदुआ नजर नहीं आया। घटनाक्रम से अफसरों को रात में ही अवगत करा दिया गया था।
कुंए के हालत पर गौर करें तो तेंदुआ ने बाहर निकलने के लिए कुंए में अंदर पीपल के पेड़ की जड़ों का सहारा लिया। पेड़ के निचले हिस्से पर भी पंजे के निशान मिले हैं। सिकंदराबाद की प्रधान के बेटे अजय तोमर के साथ तड़के कई ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो पुलिस और वन कर्मियों के चेहरे देख उन्हें शक हो गया।
ग्रामीणों का गुस्सा देख वन दरोगा अमित सोलंकी समेत सेक्शन प्रभारी सतीशचंद्र मौके से खिसक गए। ग्रामीणों का गुस्सा फॉरेस्टर मदन सिंह पर फूटा। फॉरेस्टर को उन्होंने घेरकर लताड़ भी लगाई। कर्मियों की मानें तो जब तेंदुआ भागा उस वक्त पहरेदार चारपाइयों पर सो रहे थे।