कभी ऐसा भी होता है जब सुप्रीम कोर्ट सख्त कानूनी दायरे से ऊपर उठकर दूरदराज से आए वादियों के लिए एक नरम दिल अभिभावक बन जाता है। ऐसा ही हुआ मुजफ्फरनगर के एक मुस्लिम परिवार के साथ।
मुजफ्फरनगर के जलालाबाद गांव के मोहम्मद इदरीश और उनकी पत्नी ने प्रेम विवाह करने वाली बेटी को वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सामने एक के बाद एक झूठ बोला। इनकी बातों पर यकीन कर जब चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने उस बेटी को बुलाया तो उसी बेटी ने अपने मां-बाप के झूठ की बखिया उधेड़ दी।
इन झूठ के लिए घरवालों पर अदालत के समक्ष गलतबयानी करने का मुकदमा (परजरी) चल सकता था। लेकिन चीफ जस्टिस ने नरम दिली दिखाते हुए न सिर्फ मां-बाप को झूठ को नजरअंदाज कर दिया बल्कि पिता को नसीहत दी कि बेटी को जीने दो अपनी जिंदगी। कोर्ट ने कहा बेटी बालिग है, उसे उसके मुकद्दर पर छोड़ दो।