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Health: संगीत सीखने से बढ़ती उम्र में भी जवां रहता है दिमाग, स्मृति से लेकर इन हिस्सों में होते हैं बदलाव

Fri, 29 May 2026 05:33 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

वैज्ञानिकों का मानना है कि शिक्षा, सामाजिक जुड़ाव, तनाव का स्तर और शारीरिक स्वास्थ्य भी मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर असर डालते हैं। उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क में होने वाले प्राकृतिक बदलाव स्मृति, ध्यान और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सक्रिय मानसिक जीवनशैली इस प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक हो सकती है।
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संगीत का असर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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उम्र बढ़ने के साथ मानव मस्तिष्क में धीरे-धीरे संरचनात्मक बदलाव आने लगते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार 40 वर्ष की आयु के बाद ये बदलाव अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को ब्रेन एट्रोफी या ब्रेन श्रिंकेज कहा जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक रूप से सक्रिय जीवनशैली और विशेष रूप से किसी संगीत वाद्य यंत्र को सीखना दिमागी गिरावट की रफ्तार को धीमा करने में मदद कर सकता है।
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग, हार्वर्ड हेल्थ और नेशनल ज्योग्राफिक में प्रकाशित शोध के अनुसार उम्र बढ़ने के बावजूद मस्तिष्क में नई तंत्रिका कड़ियां बनाने की क्षमता बनी रहती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक संगीत सीखना दिमाग के कई हिस्सों को एक साथ सक्रिय करता है, इसलिए इसे फुल-ब्रेन वर्कआउट माना जाता है। बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संचार धीमा पड़ सकता है। विशेष रूप से स्मृति, निर्णय क्षमता और ध्यान नियंत्रित करने वाले हिस्सों में बदलाव देखे जाते हैं।

हर व्यक्ति में समान नहीं होती प्रक्रिया
एमआरआई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि उम्र के साथ ग्रे मैटर और व्हाइट मैटर दोनों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि यह प्रक्रिया हर व्यक्ति में समान नहीं होती। जीवनशैली, शिक्षा, तनाव, सामाजिक सक्रियता और शारीरिक स्वास्थ्य जैसे कई कारक इसकी गति को प्रभावित करते हैं।
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याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्से होते हैं सक्रिय  
विशेषज्ञों के अनुसार जब कोई व्यक्ति पियानो, गिटार, तबला, वायलिन या अन्य वाद्य यंत्र सीखता है, तब दिमाग के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं। हाथों और अंगुलियों की गतिविधि के लिए मोटर कॉर्टेक्स सक्रिय होता है। स्वर और ताल पहचानने के लिए ऑडिटरी सिस्टम काम करता है। याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्से लगातार सक्रिय रहते हैं। भावनात्मक प्रतिक्रिया और रचनात्मकता भी इसमें शामिल होती है। यही कारण है कि संगीत प्रशिक्षण को मानसिक लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाता है।

महिलाओं में होता है बेहतर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में भी उम्र बढ़ने के साथ दिमागी सिकुड़न की प्रक्रिया होती है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव इसमें अतिरिक्त भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने से स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि शोध यह भी बताते हैं कि नियमित मानसिक गतिविधियां संगीत, योग, ध्यान और सामाजिक जुड़ाव महिलाओं में भी दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
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