प्रमुख विपक्षी दलों के नेता और अलग-अलग राज्यों की सरकारें देश के जंतर मंतर से अब सियासत को एक नई धार दे रही हैं। बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री और गुरुवार को केरल के मुख्यमंत्री समेत दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्री ने यहां से सियासत को आगे बढ़ाया। विपक्षी दलों के नेताओं के मुताबिक केंद्र सरकार को घेरने के लिए के लिए केंद्र सरकार की ओर से कम बजट देने वाला एक कॉमन एजेंडा भी तैयार किया गया है। जिसमें सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेता और अलग-अलग राज्यों की सरकारों को शामिल होने को कहा गया है। फिलहाल जंतर मंतर पॉलिटिक्स से विपक्षी दलों के गठबंधन की केमिस्ट्री को और मजबूत करने की तैयारी शुरू हुई है।
बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री से सिद्धारमैया समेत उनकी पूरी कैबिनेट के नेता जंतर मंतर पर पहुंचे थे। गुरुवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ जंतर मंतर पहुंचे। दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्री और उनका पूरा मंत्रिमंडल उनके राज्यों को मिलने वाले कम बजट का विरोध करने के लिए दिल्ली आए। सियासत को करीब से समझने वालों का कहना है कि दक्षिण के राज्यों की केंद्र से बगावत का पूरा ताना-बाना बुना जा चुका है। इसमें केरल और कर्नाटक तो शामिल ही है। बल्कि इस पूरे आंदोलन में उत्तर भारत के दिल्ली और पंजाब भी शामिल हो गए हैं। जबकि दक्षिण भारत के कर्नाटक और केरल राज्य का समर्थन करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी केरल के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर समर्थन जताया है। विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिहाज से कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सभी विपक्षी दलों को एकजुट होने की अपील की थी।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार एन सुदर्शन कहते हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने कम बजट के मुद्दे को उठाया है। जबकि कांग्रेस सरकार ने इस मुद्दे को उठाना शुरू किया तो दक्षिण भारत के अन्य राज्यों ने भी अपनी पुरानी समस्या के लिए आवाज मुखर करनी शुरू कर दी। सुदर्शन कहते हैं कि जो समस्या कर्नाटक के साथ है वहीं तमिलनाडु के साथ है और वहीं केरल के सामने भी आ रही है। उनका मानना है कि अगले कुछ महीनो में लोकसभा के चुनाव होने हैं। दक्षिण भारत में जिन राज्यों में गैर भाजपा शासित सरकारें है उसमें आंध्र प्रदेश को छोड़कर सभी सरकारों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। सुदर्शन का मानना है कि विपक्षी दलों के गठबंधन समूह INDIA का दक्षिण भारतीय हिस्सा दो प्रमुख मुद्दों पर एकजुट हुआ है। पहला तो केंद्र सरकार की एनडीए के विपक्ष में बनाए गए INDIA गठबंधन की नींव पड़ते वक्त तय हुआ था। दूसरा कम बजट का वह मुद्दा है दक्षिण के चार राज्य एकजुट होकर केंद्र सरकार के विरोध में आ गए हैं।
सियासी जानकारों का कहना है कि दक्षिण भारत के राज्यों की एकजुटता के साथ अब उत्तर भारत के राज्य भी शामिल होने लगे हैं। केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के शामिल होने से उनके आंदोलन का दायरा बढ़ा है। दरअसल गुरुवार को पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ-साथ विपक्षी धड़े के कई नेता भी केरल के सीएम पी विजयन के साथ शामिल हुए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरह से जंतर मंतर पर एक अलग मुद्दे के साथ सभी दल शामिल हो रहे हैं, उससे दक्षिण और उत्तर के गैर भाजपा शासित राज्यों की सियासी केमिस्ट्री मजबूत हो रही है। राजनैतिक जानकार वीएस. सिवरमन कहते हैं कि कम बजट का एक मुद्दा विपक्षी दलों के हाथ में ऐसा लगा है जिस पर सियासत खूब मजबूती से आगे बढ़ाई जा सकती है। यही वजह है कि ज्यादातर गैर भाजपा शासित राज्य इस मामले पर एकजुट हो रहे हैं।
कर्नाटक सरकार के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने बुधवार को कहा कि अभी शुरुआत की लड़ाई है। सरकार मांगे नहीं मानती है, तो आगे बड़े स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
वहीं बुधवार और गुरुवार को जंतर-मंतर पर हुए अलग-अलग सरकारों के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के नेताओं ने भी मंथन किया। पार्टी से जुड़े नेताओं के मुताबिक सिर्फ कर्नाटक सरकार ही नहीं केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों के लिए भी बजट में बड़ी कटौती की है। पार्टी का कहना है कि जितने भी राज्य केंद्र सरकार की इस गलत नीति का शिकार हो रहे हैं, वह सभी एक मंच पर आकर आगे की बड़ी रणनीति तय करेंगे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन समेत पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कम बजट मामले पर सभी राज्यों से एकजुट होने की अपील भी की।