राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को 'अग्निपथ' योजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। केंद्र पर तंज कसते हुए विपक्ष के नेता ने कहा कि 75 साल में पहली बार सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत फैसले का बचाव करने के लिए सेना प्रमुखों द्वारा मोर्चा संभाला जा रहा है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने ट्विटर पर लिखा, '75 साल में पहली बार सरकार के नीतिगत फैसले का बचाव करने के लिए सेना प्रमुखों को सामने लाया जा रहा है।' साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री अग्निपथ योजना पर चुप क्यों हैं?
भाजपा युवाओं को चुनाव तक व्यस्त रखने की कोशिश कर रही
अग्निपथ योजना पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा भाजपा 46 हजार युवकों को तैयार करके आरएसएस में लाना चाहती है। क्या किसी देश में ऐसा हुआ है कि ट्रेनिंग देकर उसके बाद उन्हें छोड़ दिया जाए। उन्होंने कहा भाजपा 4 साल तक ट्रेनिंग और स्टाइपेंड देकर युवाओं को चुनाव तक व्यस्त रखने के लिए यह काम कर रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, जिससे युवा महंगाई व बेरोजगारी के खिलाफ विरोध न करें।
सेना प्रमुखों ने की जानकारी साझा
गौरतलब है कि सशस्त्र बलों में अल्पकालिक भर्ती के लिए सरकार द्वारा लाई गई 'अग्निपथ' योजना पर बढ़ते विरोध को देखते हुए रविवार को तीनों सेनाओं ने नई नीति को लेकर जानकारी साझा की थी और उपद्रव करने वालों को चेतावनी भी दी गई थी। थल सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रतिनिधियों ने रविवार को अग्निपथ के तहत भर्ती का विस्तृत कार्यक्रम सामने रखते हुए स्पष्ट किया था कि तीनों बलों की औसत आयु कम करने के लिए इसे लागू करना जरूरी है। रक्षा मंत्रालय में सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा, जो भी युवा हिंसा और आगजनी में लिप्त रहे हैं, उन्हें भर्ती में मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि नियुक्ति से पहले पुलिस सत्यापन जरूरी है। सेना में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है।
देश के कई हिस्सों में युवा इस विवादास्पद योजना का विरोध कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में, विभिन्न शहरों और कस्बों से प्रदर्शनकारियों द्वारा रेलवे स्टेशनों में तोड़फोड़ करने, ट्रेनों में आग लगाने और सड़कों और रेलवे पटरियों को अवरुद्ध करने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित विभिन्न मंत्रियों के अलावा, सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य मंचों के माध्यम से नई योजना का जोरदार बचाव कर रहे हैं।