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पुणे में प्रॉपर्टी विवाद में वकील की हत्या: होटल में दादा ने पोते को मारी गोली, जानें कैसे खुली वारदात की पोल

Wed, 07 Oct 2026 12:08 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

लोनावला में 33 वर्षीय वकील अभय मराठे की मौत को परिवार ने राइफल चलने का हादसा बताया, लेकिन पोस्टमार्टम और होटल में मिले खून के निशानों से हत्या का शक हुआ। पुलिस के मुताबिक, प्रॉपर्टी विवाद में दादा मोटीराम ने अभय को गोली मारी और परिवार ने घटना को हादसा दिखाने के लिए सबूत मिटाए।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पुणे के लोनावला में 33 साल के वकील अभय मराठे की गोली लगने से मौत को परिवार भले ही हादसा बता रहा था, लेकिन पुलिस को शुरुआत से ही कहानी में कुछ गड़बड़ नजर आई। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर मिले गोली के निशान ने पुलिस का शक बढ़ा दिया। इसके बाद जब पुलिस होटल पहुंची तो दीवार पर पड़े खून के धब्बों और छींटों ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी। जांच में सामने आया कि अभय की कथित तौर पर उसके 83 साल के दादा मोटीराम मराठे ने प्रॉपर्टी बेचने को लेकर हुए विवाद के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने सोमवार को मोटीराम को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। वहीं, सबूत मिटाने के आरोप में परिवार के चार अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है।

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‘राइफल साफ करते समय चली गोली’, परिवार ने सुनाई थी हादसे की कहानी
लोनावला सिटी पुलिस को सोमवार दोपहर एक अस्पताल से सूचना मिली कि भुशी निवासी अभय मराठे की गोली लगने से मौत हो गई है। परिवार ने डॉक्टरों और पुलिस को बताया कि अभय होटल में अपने दादा मोटीराम की 12 बोर की राइफल साफ कर रहा था। इसी दौरान अचानक गोली चल गई और सीने में जा लगी। गोली लगते ही अभय की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार की इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया। उस समय तक इसे एक हादसा ही माना जा रहा था।

पोस्टमार्टम में दिखा ऐसा निशान, पुलिस को हुआ शक
अभय के शव को पोस्टमार्टम के लिए पुणे के ससून जनरल अस्पताल भेजा गया। वहां शव की जांच के बाद पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शुभम कुमार और स्थानीय क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रमोद क्षीरसागर को गोली लगने की चोट परिवार की बताई कहानी से मेल नहीं खाती लगी। एसपी गिल के मुताबिक, खुद से या गलती से गोली चलने पर होने वाली चोट और अभय के शरीर पर मिली चोट में अंतर था। उन्होंने कहा कि अगर राइफल गलती से चलती तो गोली का इस तरह सीने में लगना सामान्य तौर पर संभव नहीं लगता। यहीं से पुलिस ने हादसे की कहानी को शक की नजर से देखना शुरू किया।
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होटल की दीवार पर खून के छींटों ने खोला राज
क्राइम ब्रांच की टीम उस होटल में पहुंची, जहां गोली चलने की बात बताई गई थी। वहां जांच के दौरान पुलिस को होटल के काउंटर के पास दीवार पर खून का एक बड़ा निशान मिला। इसके अलावा पास में भी खून जमा हुआ था। पुलिस को दीवार पर जमीन से करीब पांच फीट की ऊंचाई पर खून के छींटे भी दिखाई दिए। इन निशानों ने जांच अधिकारियों का शक और गहरा कर दिया। एसपी गिल ने बताया कि होटल में मिले खून के निशानों से यह संदेह मजबूत हुआ कि अभय को यहीं गोली मारी गई थी और मामला महज दुर्घटना का नहीं था।

होटल स्टाफ से पूछताछ में सामने आया प्रॉपर्टी विवाद
इसके बाद पुलिस ने होटल के कर्मचारियों और मैनेजर से पूछताछ की। इसी दौरान उन्हें अभय और उसके दादा मोटीराम के बीच चल रहे प्रॉपर्टी विवाद के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, दोनों के बीच एक संपत्ति बेचने को लेकर काफी समय से मतभेद था। मोटीराम इस संपत्ति की बिक्री के खिलाफ थे।

झगड़े के बाद दादा ने निकाल ली थी राइफल
पुलिस का आरोप है कि सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे अभय और उसके दादा के बीच इसी प्रॉपर्टी को लेकर फिर जोरदार बहस हुई। पुलिस के अनुसार, बहस के दौरान अभय कथित तौर पर अपने दादा की ओर बढ़ा। इसी दौरान मोटीराम ने अपनी लाइसेंसी राइफल निकाल ली और अभय पर गोली चला दी। गोली लगने से अभय की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद परिवार ने पूरे मामले को हादसे का रूप देने की कोशिश की, ताकि किसी को असली घटना का पता न चल सके।

हत्या के बाद शव कमरे में ले गए, CCTV और DVR भी गायब
पुलिस के मुताबिक, गोली चलने की जानकारी मिलने के बाद अभय की बहन, चाचा, चाची और चचेरे भाई समेत परिवार के अन्य लोग होटल पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने अभय के शव को होटल के एक कमरे में पहुंचाया। इसके बाद होटल में लगे CCTV कैमरे और उनका डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर यानी DVR भी निकाल लिया गया और छिपा दिया गया। पुलिस का आरोप है कि परिवार के सदस्यों ने होटल कर्मचारियों को घटना के बारे में किसी को कुछ बताने पर धमकाया। इसके बाद अभय के माता-पिता को घटना की जानकारी दी गई।

सबूत मिटाने के आरोप में चार रिश्तेदार गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अभय की बहन राजश्री पवार, चाचा हिरामन मराठे (54), चाची कविता मराठे और चचेरे भाई मनोज मराठे (32) को सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के बाद परिवार के सदस्यों ने किस तरह से सबूत हटाए और CCTV रिकॉर्डिंग को क्यों छिपाया।

दादा के पास थीं दो लाइसेंसी राइफलें
पुलिस के मुताबिक, मोटीराम मराठे के पास दो लाइसेंसी राइफलें थीं। उन्होंने वर्ष 1970 में शिकार के लिए इन हथियारों के लाइसेंस हासिल किए थे। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना में इस्तेमाल हुई राइफल कौन-सी थी और गोली चलने के बाद हथियार को लेकर क्या-क्या किया गया।

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हत्या, सबूत मिटाने समेत कई धाराओं में केस
मोटीराम और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा अपराध के सबूत गायब करने या आरोपी को बचाने के लिए झूठी जानकारी देने से जुड़ी धारा 238 और सबूत के तौर पर पेश किए जाने से रोकने के लिए दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड नष्ट करने से संबंधित धारा 241 लगाई गई है। इसके साथ ही आरोपियों के खिलाफ भारतीय शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।

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