करोड़ों लंबित मुकदमों के बोझ तले दबी अदालतों को सरकार अब राहत देने की तैयारी में है। इस दिशा में पहल करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केंद्र सरकार के मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर सरकारों से जुड़े मुकदमों को प्राथमिकता के आधार पर विशेष अभियान के तहत निपटाने का अनुरोध किया है। प्रसाद ने साथ ही यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में सभी मंत्रालय, विभाग और उपक्रम किसी भी तरह के विवाद को सुलझाने के लिए अदालत का अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करें।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि विवादों के निपटारे के लिए विशेषज्ञों की राय के अलावा मध्यस्थता की प्रक्रिया को महत्व दिया जाए। गौरतलब है कि देश में लंबित 3.14 करोड़ मुकदमों में से 46 फीसदी मुकदमों में सरकार एक पक्ष है। पत्र की शुरुआत में कानून मंत्री ने लंबित मुकदमों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंताओं को रेखांकित करते हुए कहा है कि अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करने के लिए सरकार कई तरह की पहल कर रही है। इसके बावजूद लंबित मुकमदे की संख्या कम करने में आशातीत सफलता नहीं मिल रही है।