आयोग ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि ‘फ्री स्पीच’ की आड़ में इस तरह के जानबूझकर प्रचार वाले संबोधनों को चुनाव के समय छूट दी गई तो ‘पहुंच’ वाले उम्मीदवार इसका लाभ उठा लेगे। ये वे उम्मीदवार होंगे, मजबूत नेटवर्क रखते हैं और मीडिया में जिनके खास संबंध हैं। ऐसे उम्मीदवार समाज में अपने प्रभाव का लाभ उठाकर ऐसी ‘खामोश’ सेवाओं के जरिए विपक्षी के खिलाफ एक असामान्य बढ़त बना लेंगे।