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'तुम देखना एक दिन मुझे शौर्य चक्र मिलेगा' पत्नी से हर बार यही कहते थे शहीद प्रमोद

Tue, 16 Aug 2016 12:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : times of india
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"देश मेरी मां है और इसकी रक्षा के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। तुम देखना एक दिन मुझे मेरी बहादुरी के लिए शौर्य चक्र मिलेगा।" स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में देश के लिए शहीद हुए सीआरपीएफ के कमांडेंट प्रमोद कुमार रोज अपनी पत्नी से यही बात कहते थे। 
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सोमवार को भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब उनके बेस कैंप के निकट आतंकियों के होने की सूचना मिली तब प्रमोद कुमार बिना कुछ सोचे समझे तुरंत जीप में बैठकर मोर्चे के लिए निकल लिए। वहां उनकी ताक में बैठे दुश्मनों की गोलियों ने इस बहादुर जवान के शरीर को छलनी कर दिया। 

जम्मू-कश्मीर के नौहट्टा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए सीआरपीएफ कमांडेंट प्रमोद कुमार ने अपनी मौत से कुछ मिनट पहले ही अपनी यूनिट में तिरंगा फहराकर जोशीला भाषण दिया था। जिसमें उन्होंने अपने साथियों से देश के लिए हर समय जान देने और दुश्मनों को उनके मंसूबों में कामयाब न होने देने की हुंकार भरी थी। 
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प्रमोद ने कई शहीदों का उदाहरण देते हुए अपने साथियों में उत्साह और जोश भर दिया था। तभी साढ़े 9.30 बजे के करीब उन्हें सूचना मिली की आतंकियों ने नजदीक ही हमला कर दिया है वह तुरंत जीप में सवार होकर मौके के लिए निकल लिए। 
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मशहूर थे प्रमोद कुमार की बहादुरी के किस्से

- फोटो : crpf
बताया जाता है कि कुछ देर चली मुठभेड़ में ही उन्होंने दो आतंकियों को ढेर भी कर दिया लेकिन तभी सामने की तरफ से आई एक गोली उनकी गर्दन में आकर धंस गई। उन्हें गंभीर हालत में बेस कैंप स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई। 

मूल रूप से ‌बिहार के रहने वाले 43 साल के प्रमोद कुमार पिछले महीने ही प्रमोशन पाकर असिस्टेंट कमांडेंट से कमांडेंट बने थे। वह सीआरपीएफ में 1998 बैच के अधिकारी थे। उनकी पत्नी नेहा त्रिपाठी बताती हैं कि मौत से एक घंटे पहले ही उन्होंने मुझसे बात की थी। 

पति की मौत के बाद सुधबुध खो चुकी नेहा बताती हैं कि उनकी छह साल की बेटी आरना डांस सीख रही है वो उसकी वीडियो देखकर खुश हुआ करते थे.... अब कौन उसे देखेगा। 

मैं नहीं जानती मैं उनके बगैर क्या करूंगी। प्रमोद कुमार की बहादुरी के किस्से उनके दोस्त और साथी भी सुनाते हैं। कहते हैं कि हर मोर्चे पर प्रमोद की कोशिश हुआ करती थी कि वह खुद ही आगे रहकर दुश्मनों का सामना करें। 
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बहादुरी के कारण खूब मिले सम्मान, एसपीजी में भी रही तैनाती

- फोटो : PTI
उनकी इस बहादुरी के लिए ही सीआरपीएफ ने उन्हें 2014 और 2015 में सम्मानित किया था। सीआरपीएफ के अधिकारी कहते हैं कि 18 साल की नौकरी में उन्होंने वो श्रीनगर, त्रिपुरा, आसाम, जम्मू, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तमाम मुश्किल मोर्चों पर रह चुके हैं जहां हमेशा उनकी बहादुरी और नेतृत्व के लिए सम्मानित किया जाता रहा। 

यही कारण है कि दो 2011 से 2013 तक वह दो साल के लिए डेप्यूटेशन पर स्पेशल प्रोटेक्‍शन ग्रुप (SPG) में भी रहे। 2014 में ही उन्हें जम्‍मू कश्मीर में तैनात किया गया था। 

सीआरपीएफ के निदेशक के दुर्गा प्रसाद भी प्रमोद की तारीफ करते हुए कहते हैं कि वह बहुत बहादुर अधिकारी थे। उन्हें 2015 में डीजी प्रशस्ति पत्र और 2011 -2014 में विशेष सम्मान मिला था। इन सम्मानों को सीआरपीएफ में काफी उच्च नजरिए से देखा जाता है। 

प्रमोद के साथी कहते हैं कि वह हमारे सबसे बेहतर और काबिल अधिकारियों में से थे जिनकी नेतृत्व क्षमता की हमेशा तारीफ की जाती थी। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी प्रमोद कुमार की मौत पर शोक जताते हुए कहा कि मैं उनकी मौत से काफी दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं शोक संतृप्त परिवार के साथ हैं।
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