पुलिस के अनुसार, रोहित बीते कुछ समय से अपने परिवार से अलग रह रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि रोहित का हाल के वर्षों में अपने परिवार के साथ बहुत कम संपर्क था।
बच्चों समेत 19 लोगों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य का शनिवार तड़के पुणे में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 50 वर्षीय रोहित आर्य ने 10-12 साल के सत्रह बच्चों और दो व्यस्कों को गुरुवार को मुंबई के पवई इलाके में एक स्टूडियो में बंधक बना लिया था। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने एक समन्वित कार्रवाई करते हुए बच्चों को छुड़ाया। करीब तीन घंटे चले इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने रोहित को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई।
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जेजे अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद पुणे ले जाया गया शव
रोहित के शव का मुंबई के जेजे अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ और फिर उसका शव पुणे उसके घर ले जाया गया। शनिवार तड़के रोहित आर्य का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसमें रोहित की पत्नी, बेटा और परिवार के अन्य करीबी लोग ही शामिल हुए। पुलिस के अनुसार, रोहित बीते कुछ समय से अपने परिवार से अलग रह रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि रोहित का हाल के वर्षों में अपने परिवार के साथ बहुत कम संपर्क था।
सरकारी टेंडर का पैसा नहीं मिलने का दावा
रोहित आर्य पुणे का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि रोहित आर्या को एक स्कूल के काम का सरकारी टेंडर मिला हुआ था। रोहित का कहना है कि उसे अपने द्वारा किये गए काम के पैसे नही मिले थे। रोहित ने अपने बकाया पैसे के लिए कई बार आंदोलन भी किया था। रोहित का कहना था कि उसका दो करोड़ रुपया बकाया था। कहा जा रहा है कि उसने इसी कारण बच्चों को बंधक बनाया था। महाराष्ट्र भी रोहित आर्य के भुगतान संबंधी मामले की जांच कर रही है। शुक्रवार को महाराष्ट्र के मंत्री दादा भुसे ने कहा कि उन्होंने बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य के शिक्षा विभाग के साथ किए गए काम के बारे में रिपोर्ट मांगी है।