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...तो 1974 के बाद हो सकती है देश की सबसे बड़ी हड़ताल

Thu, 30 Jun 2016 04:31 AM IST
संतोष कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार बेशक 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करके केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने का दावा कर रही है लेकिन आयोग की सिफारिशों से करीब 16 लाख रेल कर्मचारियों समेत 32 लाख केंद्रीय कर्मचारी खुश नहीं हैं।
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रेलवे कर्मचारियों ने 11 जुलाई को हड़ताल पर जाने का भी ऐलान कर दिया है। इस बीच सरकार के साथ अगर रेल यूनियनों का समझौता नहीं हो पाता तो 1974 के बाद पहली बार देश में इतने बड़े पैमाने पर हड़ताल होगी।

आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महासचिव व सभी केंद्रीय विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के संगठन नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन के संयोजक शिवगोपाल मिश्रा बताते हैं कि तकनीकी रूप से सिर्फ 14 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
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आयोग ने सभी अलाउंस को जोड़कर 23 प्रतिशत की जादूगरी दिखा रही है। इसके उलट छठें वेतन आयोग ने 52 और पांचवें वेतन आयोग से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ सरकार के सामने हमने पहले ही अपनी आपत्ति जाहिर कर दी थी। हमारी मांग थी कि नई पेंशन नीति को हटाकर पुरानी पेंशन नीति लागू किया जाये।

साथ ही न्यूनतम वेतन 26 हजार किया जाये। जबकि वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने की सिफारिश की है। बावजूद इसके सरकार ने हमारी मांगों को दरकिनार करते हुये बिना बदलाव के ही आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया है।

शिव गोपाल मिश्रा ने चेतावनी दी कि अभी भी केंद्र सरकार के पास वक्त है। 11 जुलाई से पहले सरकार इस मामले में अपना रूख साफ करना चाहिये। सरकार यदि बातचीत कर बीच का रास्ता निकालना चाहती है तो हम तैयार हैं।

बावजूद इसके अगर हमारी मांगे नहीं मानी गई तो 1974 के बाद पहली बार सबसे बड़ी हड़ताल होने जा रही है। इससे देश की जनता की परेशानी के लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी।
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