राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को चारा घोटाले के एक मामले में शनिवार को 14 साल के कारावास और 60 लाख रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई गई। यह मामला झारखंड की दुमका ट्रेजरी से साढ़े तीन करोड़ रुपये की अवैध निकासी से संबंधित है। उन्हें इस मामले में 19 मार्च को दोषी ठहराया गया था।
सीबीआई की विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह ने लालू को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सात साल और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सात साल की सजा का एलान किया। दोनों सजाएं एक के बाद एक चलेंगी। इस तरह उन्हें कुल 14 साल की सजा भुगतनी होगी।
उनके वकील प्रभात सिंह ने कहा कि अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। उनके मुताबिक पिछले तीन मामलों में लालू को मिली सजाएं साथ-साथ चल रही थीं, जिसमें अधिकतम सजा पांच साल की थी। हम चौथे मामले में दी गई 14 साल की सजा को भी उसमें शामिल करने की अर्जी देंगे। अगर वह प्रार्थना स्वीकार कर ली गई तो लालू को 14 साल की जेल काटनी होगी। अगर अस्वीकार हुई तो उन्हें 19 साल जेल में बिताने होंगे।
सजा सुनाने के बाद कोर्ट पहुंचे लालू
जज द्वारा सजा सुनाए जाने के वक्त लालू कोर्ट में मौजूद नहीं थे। तबीयत खराब होने के कारण उन्हें रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लिहाजा, उन्हें वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सजा सुनाई गई। याद रहे कि वे पिछले साल 23 दिसंबर से रांची के बिरसा मुंडा कारागार में कैद हैं।
शत्रु पहुंचे मिलने
भाजपा के बागी नेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा शनिवार को लालू से अस्पताल में मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे उनके पुराने मित्र और मिट्टी से जुड़े नेता है। इसलिए वे उनका हालचाल पूछने आए हैं।
तेजस्वी ने कहा, जान को खतरा
लालू के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा की साजिश को देखते हुए लालू की जान को खतरा है। वे भाजपा के साथ जदयू की राजनीतिक साजिश का शिकार हुए हैं।
अब तक की सबसे बड़ी सजा