पीएम मोदी के खिलाफ आक्रामक रूख अपना रही कांग्रेस को बैकफुट पर धकेलने के लिए भाजपा ने लालू यादव को औजार बनाया है। लालू पर हमले के जरिए पार्टी की रणनीति कांग्रेस को घेरने की है। इस कवायद में भाजपा ने लालू की तुलना राबर्ट वाड्रा से कर दी है। भाजपा नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री बिहार सुशील मोदी ने कहा है कि लालू यादव बिहार के राबर्ट वाड्रा हैं। हालांकि लालू के खिलाफ उन्होंने आय से अधिक संपत्ति के उन मामलों को ही सामने रखा है जिसे वे बिहार की धरती से उठाते रहे हैं। लेकिन लालू के मामले को बड़ा बनाकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति के तहत भाजपा ने विशेष रूप से सुशील मोदी को दिल्ली बुलाकर देश की राजधानी से हमला बोलने को कहा है।
लालू- नीतीश के बीच बढ़ी तकरार, RJD की 'बीजेपी हटाओ' रैली से JDU ने किया किनारा
दिल्ली में लालू के खिलाफ मैदान संभालते हुए सुशील मोदी ने कहा कि लालू बिहार के राबर्ट वाड्रा हैं। उन्होंने लालू पर गलत तरीके से संपत्ति हासिल करने के तमाम आरोप जड़े। साथ ही यह भी कहा कि लालू के करीबी नेता सीबीआई जांच से बचने के लिए केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं।
सुशील मोदी का खत्म हुआ राजनीतिक बनवास
वर्ष 2013 में नीतीश कुमार के साथ भाजपा के बिगडे रिश्तों के समय से पार्टी आलाकमान के आंखों में खटक रहे सुशील मोदी को लालू प्रकण ने बिहार की राजनीति में नया अवसर प्रदान किया है। उन्हें बिहार की राजनीति में बेअसर करने के लिए विधानसभा में भाजपा ने कमान प्रेम कुमार को सौंपा तो मोदी के करीबी मंगल पांडे की प्रदेश अध्यक्ष पद से छुट्टी करते हुए नित्यानंद राय को राज्य भाजपा का ताज सौंपा। मगर लालू प्रकरण को लेकर सुशील मोदी ने जिस कदर आक्रमकता दिखाई है। उसे देखते हुए आलाकमान को भी उन्हें लालू के खिलाफ मोर्चे पर उतारने को विवश होना पड़ा है।
मोदी का उदय क्या भाजपा की नीतीश से बढती नजदीकी है?
बिहार भाजपा में सुशील मोदी के उदय को नीतीश की भाजपा से बढ़ती नजदीकी के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस और लालू से नीतीश की बढ़ रही दूरी के बीच भाजपा को अपने पूर्व सहयोगी से उम्मीदे बंधी हुई हैं। नीतीश ने भी इधर कई मौकों पर पीएम मोदी और भाजपा की पसंद को समर्थन कर अपने इरादे स्पष्ट किए है। सुशील मोदी के साथ नीतीश की केमिस्ट्री बेहद कारगर रही है। शायद यही वजह है कि भाजपा ने सुशील मोदी को आगे कर नीतीश की तरफ अपना एक कदम और आगे बढ़ाया है। सुशील मोदी के उदय को नीतीश की भाजपा से बढ़ती नजदीकी के रूप में देखा जा रहा है।