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Sharad Yadav: जेपी आंदोलन के शिष्य ने एक गुरुभाई को हराया था चुनाव में, तो एक के बने राजनीतिक गुरु

Fri, 13 Jan 2023 05:31 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
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शरद यादव - फोटो : अमर उजाला
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जयप्रकाश नारायण ने जब सत्तर के दशक में देशव्यापी आंदोलन छेड़ा था तो इसमें लालू प्रसाद, शरद यादव और बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उभर कर निकले थे। इन तीनों गुरुभाइयों के बीच की कड़ी बने थे शरद यादव। नीतीश उन्हें राजनीतिक गुरु मानते हैं, जबकि मधेपुरा लोकसभा सीट से उन्होंने अपने दूसरे गुरुभाई लालू प्रसाद को हराया था।

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यह वह दौर था जब शरद ने जनता दल से अलग होकर जनता दल (यू) बना लिया था। हालांकि बाद में चुनाव आयोग में वह नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले गुट से पार्टी का दावा हार गए थे। लेकिन 2003 में वह फिर से नीतीश के साथ जुड़ गए। नीतीश ने उन्हें 2004 में राज्यसभा भेजा। उन्हें मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू कराने में भी महत्वपूर्ण किरदार माना जाता है।

वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री 
शरद यादव 1999 और 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कई विभागों के मंत्री रहे। 2009 में ही वह मधेपुरा लोकसभा चुनाव जीते लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में जदयू की हार के बाद नीतीश से उनके रिश्तों में खटास आ गई थी। तब 2018 में उन्होंने एलजेडी का गठन कर लिया। शरद यादव ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एचडी देवगौड़ा, गुरुदास दासगुप्ता, मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव के साथ की।
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तीन राज्यों में राजनीति
छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने वाले शरद यादव ने बिहार की राजनीति में भी बड़ा मुकाम हासिल किया है। शरद यादव ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और फिर बिहार में अपना राजनीतिक परचम लहराया। 

किसान परिवार से इंजीनियर बनने का सफर 
शरद यादव का जन्म 1 जुलाई 1947 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के बंदाई गांव में एक किसान परिवार में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। वह इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडलिस्ट थे। उन्होंने रॉबर्ट्सन मॉडल साइंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री भी प्राप्त की है। वह बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होनहार रहे। 

लोहिया के विचारों से प्रभावित, जेपी के पहले उम्मीदवार
डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से प्रेरित होकर सक्रिय युवा नेता के तौर पर कई आंदोलनों में हिस्सा लिया और मीसा के तहत 1969-1970, 1972 और 1975 में हिरासत में लिए गए। पहली बार 1974 में वे मध्य प्रदेश की जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। यह जेपी आंदोलन का समय था और हलधर किसान के रूप में जेपी के चुने गए पहले उम्मीदवार थे। 

युवा जनता दल के अध्यक्ष रहते दो बार सांसद
जबलपुर से 1974 और 1977 में सांसद चुनकर आए तो उस वक्त वह युवा जनता दल के अध्यक्ष रहे। 1986 में वह राज्यसभा सांसद चुने गए और 1989 में यूपी की बदाऊं लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर तीसरी बार संसद पहुंचे। वह 1989-1990 में टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री रहे। 1996 में वह पांचवीं बार लोकसभा का चुनाव जीते और 1997 में उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 2012 में संसद में उनके बेहतरीन योगदान को देखते हुए 'उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार 2012' से नवाजा गया।

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